लालू की पुत्री मीसा को है जीत का भरोसा

पटना| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 15 अप्रैल 2014 (17:33 IST)
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पटना। पाटलिपुत्र सीट से दिग्गजों के खिलाफ चुनावी रण में पदार्पण कर रही मीसा भारती को अपने पिता और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख के वोट बैंक के अलावा अपने पति के प्रबंधन कौशल के बूते जीत का यकीन है।


चारा घोटाले में अभियुक्त होने के कारण चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने के बाद लालू ने पाटलिपुत्र सीट से अपनी बेटी को उतारा है जिसका सामना टिकट नहीं मिलने से खफा होकर भाजपा में शामिल हुए रामकृपाल यादव और 2009 आम चुनाव में लालू को हराने वाले जदयू के रंजन प्रसाद यादव से है। कम्प्यूटर इंजीनियर और एमबीए होने के कारण मीसा के पति शैलेष उनके चुनाव अभियान को तकनीकी सहयोग दे रहे हैं।
मीसा ने कहा कि शैलेष का अनुभव उनके बहुत काम आ रहा है। उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर उनका अनुभव काम आ रहा है। हम प्रचार-प्रसार के नए तरीके अपना रहे हैं। हमने अधिक नियोजित ढंग से किया है। यह पूछने पर कि क्या उनका चुनाव उनके पिता के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है, उन्होंने ना में जवाब दिया।

उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है। यह उनकी (लालू) सीट है जिस पर वे 2009 में हारे थे। उनके लिए बिहार की सभी 40 सीटें प्रतिष्ठा का प्रश्न है जिसमें पाटलिपुत्र शामिल है। वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और चूंकि मैं उनकी बेटी हूं तो उनका फर्ज भी है कि मेरी मदद करें। लालू और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के चुनाव अभियानों में हमेशा सक्रिय रहीं मीसा ने स्वीकार किया कि खुद के लिए वोट मांगना अलग है।

उन्होंने कहा, यह अलग अनुभव है। आपको अपने लिए वोट मांगते समय लोगों को आश्वस्त करना पड़ता है। उनके बीच अधिक समय बिताना होता है ताकि वे आपको समझ सकें। पार्टी छोड़ने वाले रामकृपाल यादव से संबंध के बारे में पूछने पर मीसा ने कहा कि वे हमेशा उसके लिए 'चाचा' रहेंगे।

उन्होंने कहा, मैंने कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वे मेरे चाचा थे और रहेंगे। व्यक्तिगत रिश्ते अपनी जगह रहेंगे और राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह। उनके पति के लिए यह चुनाव एक नए उत्पाद या ब्रांड को लांच करने जैसा है और वे इसके लिए अपने पूरे कॉर्पोरेट अनुभव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, मीसा अच्छी नेता हैं और मैं अच्छा प्रबंधक हूं लिहाजा यह तालमेल कामयाब होगा। उसके पास नाम, करिश्मा और लोगों से मिलने की ललक है और उन्हें वोट में बदलना मेरा काम है।

आईसीआईसीआई बैंक और इंफोसिस के लिए काम कर चुके शैलेष ने कहा, बड़ी कंपनियों के साथ काम कर चुका हूं और नियोजन तथा प्रबंधन का मेरा अनुभव काम आ रहा है। यह 30 दिन के भीतर नया ब्रांड खड़ा करने जैसा है। मुझे लगा कि पारंपरिक तरीका काम नहीं आएगा लिहाजा मैंने मास्टर प्लान बनाकर पाटलिपुत्र सीट के भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और सांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण किया।
शैलेष ने कहा, पाटलिपुत्र में छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें से मनेर और मसौरही राजद का गढ़ है यानी वहां से मजबूत बढ़त लेने पर हमारी स्थिति दूसरे से बेहतर रहेगी। इसके अलावा 25 प्रतिशत मतदाता उम्मीदवार की प्रोफाइल पर अपना वोट डालते हैं और एमबीबीएस होने के कारण मीसा उनके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर काम कर सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों के समर्थन से मीसा का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा, शुरुआत में वे असमंजस में थीं चूंकि हालात ऐसे बन गए थे कि उनके पिता के नहीं लड़ पाने के कारण उन्हें खड़ा होना पड़ा लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से इसे स्वीकार किया। लोगों ने उसकी कड़ी मेहनत को सराहा चूंकि वह लालू यादव की बेटी बनकर नहीं बल्कि आम उम्मीदवार की तरह उनसे मिल रही है।

उन्होंने कहा, वह पहले भी प्रियंका (गांधी) की तरह अपने परिवार के चुनाव अभियान का संचालन करती रही हैं। अब लोग उनके पिता (लालू) से पूछ रहे हैं कि इतने साल आपने उसे सक्रिय राजनीति से दूर क्यों रखा? (भाषा)



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