वित्तीय अनुशासन का असर नहीं-चिदंबरम

नई दिल्ली (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 7 दिसंबर 2007 (21:03 IST)
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि ह एफआरबीएम कानून के तहत वित्तीय अनुशासन लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है लेकिन इसका इस्तेमाल ह सामाजिक क्षेत्र परियोजनाओं पर खर्च में कटौती के लिए नहीं करेगी।

मौजूदा वित्तवर्ष की पहली तिमाही में प्राप्तियों एवं व्यय की त्रैमासिक समीक्षा पर एक वक्तव्य में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने लोकसभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन का कार्यान्वयन व्यय प्रबंधन सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लेकिन यह सब संप्रग सरकार की महत्वाकांक्षी समाज कल्याण पहलों की कीमत पर नहीं किया जाएगा।
चिदंबरम ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता पूँजी बाजारों में उतार-चढ़ाव तथा अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कीमतों में तेजी से निपटने की चुनौती के बावजूद सरकार को मौजूदा वित्तवर्ष में वित्तीय अनुशासन बने रहने की उम्मीद है। इस वित्तवर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3-3 प्रतिशत तथा राजस्व घाटा जीडीपी का 1.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि हम व्यय प्रबंधन सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेंगे साथ ही विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं एवं अन्य प्राथमिक क्षेत्रों को बजट अनुमानों के अनुसार धन मुहैया कराया जाएगा।

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में राजस्व घाटा 68646 करोड़ रुपए रहा जो 2007-08 के कुल बजटीय अनुमान का 96 प्रतिशत है। चिदंबरम ने कहा कि गत वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 83 प्रतिशत था।
चिदंबरम ने कर राजस्व विकास दर को प्रभावी बताया। सरकार ने इस साल की पहली तिमाही में 28 प्रतिशत अधिक राजस्व हासिल किया। प्रत्यक्ष कर में 40 प्रतिशत तथा अप्रत्यक्ष कर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।


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