मशहूर गायिका शमशाद बेगम का निधन

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नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में ‘मेरे पिया गए रंगून’ और ‘कजरा मुहब्बत वाला’ जैसे गीतों को अपनी आवाज से सदाबहार बनाने वाली जानीमानी गायिका शमशाद बेगम का 94 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया।

शमशाद बेगम की बेटी उषा ने प्रेस ट्रस्ट को बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थीं और अस्पताल में थीं। पिछली रात उनका निधन हो गया। उनके जनाजे में सिर्फ कुछ मित्र मौजूद थे।

शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। लाहौर के पेशावर रेडियो पर 16 दिसंबर 1947 को पहली बार उनकी आवाज दुनिया के सामने आई, जिसके जादू ने लोगों को उनका प्रशंसक बना दिया। वर्ष 1955 में अपने पति गणपत लाल बट्टो के निधन के बाद से शमशाद मुंबई में अपनी बेटी उषा रात्रा और दामाद के साथ रह रही थीं।
शमशाद बेगम द्वारा गाये चर्चिम गीतों में ‘कभी आर कभी पार’, ‘कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना’, ‘सइयां दिल में आना रे’, ‘ले के पहला पहला प्यार’, ‘बूझ मेरा क्या नाम रे’ और ‘छोड़ बाबुल का घर’ शामिल हैं।

मशहूर संगीतकार ओपी नैयर ने उनकी आवाज को मंदिर की घंटी बताया था। शमशाद बेगम ने उस समय सभी मशहूर संगीतकारों के साथ काम किया। उनके हिट गीत में मेरे पिया गए रंगून, या 'मदर इंडिया' का होली आई रे कन्हाई शामिरहे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1919 को हुआ था।
शमशाद बेगम ने कई मशहूर गाने गए जैसे कजरा मोहब्बत वाला, अखियों में ऐसा डाला, मेरी नींदों में तुम, मेरे ख्वाबों में तुम, तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर, हम भी देखेंगे और लेके पहला-पहला प्यार जैसे सदाबहार गीत के बोल सभी हो याद होंगे। इन सभी गीतों को शमशाद बेगम ने अपनी खनकदार आवाज बख्शी है।

अपनी पुरकशिश आवाज से हिंदी फिल्म संगीत की सुनहरी हस्ताक्षर शमशाद बेगम के गानों में अल्हड़ झरने की लापरवाह रवानी, जीवन की सचाई जैसा खुरदरापन और बहुत दिन पहले चुभे किसी काँटे की रह रहकर उठने वाली टीस का सा एहसास समझ में आता है।
उनकी आवाज की यह अदाएं सुनने वालों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है और उनके गानों की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज भी उन पर रीमिक्स बन रहे हैं। (भाषा)

 

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