जसवंत और आडवाणी रूबरू हुए

नई दिल्ली| भाषा|
भाजपा से निष्कासित किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी सोमवार को पहली बार एक दूसरे से रूबरू हुए।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान जसवंतसिंह ने गोरखालैंड पृथक राज्य से संबंधित मुद्दा उठाया। आडवाणी से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपने पूर्व सहयोगी, विपक्ष के नेता से आग्रह करता हूँ कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा शुरू की गई हड़ताल और आंदोलन को समाप्त करने और सरकार की ओर से गोजमो को बातचीत का न्योता दिए जाने के संबंध में सदन द्वारा कोई अपील जारी करने में वह भी साथ दें। भाजपा के घोषणापत्र में भी गोरखालैंड पृथक राज्य की बात कही गई है।
इस पर आडवाणी ने अपने संक्षिप्त जवाब में कहा कि मेरे साथी जसवंतसिंह ने मेरा उल्लेख किया है। उन्होंने हमारे घोषणापत्र में गोरखालैंड के उल्लेख की बात भी कही है।

पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद संसद के बाहर या भीतर दोनों नेताओं के बीच किसी तरह का यह पहला संवाद था। दोनों ही नेता पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में टिप्पणियाँ किए जाने के कारण आरएसएस की मार झेल चुके हैं। आडवाणी को जहाँ पार्टी अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था वहीं जसवंत को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से ही हाथ धोना पड़ा। (भाषा)

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