अर्द्धनग्न डांस के वीडियो ने पकड़ा तूल

नई दिल्ली| भाषा|
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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने निकोबार द्वीप समूह में जारवा जनजाति की अर्धनग्न महिलाओं के नृत्य से संबंधित वीडियो फुटेज की घटना को ‘शर्मनाक’ करार देते हुए इस मामले की विस्तृत जांच की सिफारिश की है। आयोग ने आदिवासी मामलों के मंत्रालय से कहा है कि यह ‘गंभीर मामला’ है और इस पर गौर करने की जरूरत है।

आयोग की सदस्य के कमला कुमारी ने कहा कि यह शर्म की बात है कि आजादी के इतने सालों बाद भी इस देश के जनजाति समुदाय के साथ ऐसी घटना हुई है। हमें इसके लिए अफसोस है। इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है।’

उन्होंने कहा कि आयोग ने आदिवासी मामलों के मंत्रालय से इस घटना की विस्तृत जांच की सिफारिश की है। आयोग जल्द ही बैठक करके आगे की रणनीति पर विचार करेगा।
गौरतलब है कि यह मामला उस समय तूल पकड़ गया था जब लंदन के अखबार ‘ऑब्जर्वर’ ने पर्यटकों के सामने जारवा जनजाति की अर्धनग्न महिलाओं के नृत्य से संबंधित कथित घटना के बारे में खबर दी और इससे जुड़ा एक वीडियो अपलोड किया।

इस प्रकरण के बाद केन्द्र सरकार ने अंडमान निकोबार प्रशासन को मामले की भलीभांति जांच करने का निर्देश दिया था। इस वीडियो फुटेज के बारे में कमला कुमारी ने कहा कि हमने अभी फुटेज नहीं देखे हैं। अभी केवल अखबारों में इस संबंध में खबर देखी है। फुटेज देखने के बाद ही आगे की बात की जा सकती है।
इसके अलावा अंडमान पुलिस ने पर्यटकों के सामने जारवा आदिवासी महिलाओं के अर्धनग्न नृत्य को फिल्माने और उसे इंटरनेट पर अपलोड करने के सिलसिले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता, सूचना और प्रौद्योगिकी कानून, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तथा प्राचीन जनजाति संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।
चिदंबरम के सख्त निर्देश : केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने के प्रशासन को निर्देश दिया कि जारवा आदिवासी महिलाओं के उत्पीडन में शामिल वीडियोग्राफर और टूर ऑपरेटर को पकड़कर उनसे पूछताछ की जाए।
चिदंबरम ने कहा, ‘अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जो भी नीतियां वहां लागू हैं, उनका उल्लंघन इस मामले में हुआ है। हमें वीडियो की कॉपी मिल गई है। उसे जांच के लिए भेजा गया है।’

उन्होंने कहा, ‘ देखने से लगता है कि वीडियो तीन या चार साल पहले बनाया गया है। वीडियो बनाने वाले वीडियोग्राफर और टूर ऑपरेटर को पकड़कर उनसे पूछताछ करने का निर्देश मैंने अंडमान निकोबार प्रशासन को दिया है।
अंडमान में अब भी जारी है ‘ह्यूमन सफारी’ : लंदन में आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने आरोप लगाया कि भारत के अंडमान निकोबार द्वीपों पर अब भी ‘ह्यूमन सफारी’ जारी है।

जरावा आदिवासियों के साथ अनैतिक संपर्क पर से पहली बार पर्दा उठाने वाले सर्वाइवल इंटरनेशनल का कहना है कि एक गुप्त रिकार्डिंग में एक टूर ऑपरेटर ने एक अंडरकवर पत्रकार से पुलिस को देने के लिए 10 से 15 हजार रुपयों की मांग की जो साबित करता है कि अलोकप्रिय ‘ह्यूमन सफारी’ अब भी जारी है।
संस्थान ने बताया कि यह रिकार्डिंग पत्रकार गेथिन चैम्बरलेन ने की। रेकार्डिंग के अनुसार, पोर्ट ब्लेयर के एक टूर ऑपरेटर ने कहा, ‘यात्रा के लिए, वाहन आदि मिलाकर, सब लेकर यही कोई 25 से 30 हजार रुपए...क्योंकि पुलिसकर्मी 10 से 15 हजार ले लेंगे। और फिर वाहन और आदिवासियों के लिए कुछ तोहफे जैसे.. फल, बिस्कुट आदि..।’

सर्वाइवल इंटरनेशनल का कहना है कि यह आरोप लगाया जा रहा है कि यह वीडियो दस साल पहले उस दौरान बनाया गया है जब एहतियात नहीं बरता जा रहा था, लेकिन इस नए ऑडियो रिकार्डिंग से साबित होता है कि यह आज भी जारी है।
सर्वाइवल के निदेशक स्टीफेन कोरी का कहना है कि पक्का सबूत है कि ‘ह्यूमन सफारी’ अब भी जारी है। इसके जारी रहने का एकमात्र कारण अंडमान ट्रंक रोड का जरावा क्षेत्र से होकर गुजरना है।

जारवा क्षेत्र में घुसे 15 लोग गिरफ्तार : अंडमान निकोबार द्वीप समूह के जारवा क्षेत्र में प्रवेश को लेकर ‘प्रोटेक्शन ऑफ एबोरिजनल ट्राइब (पीएटी) रेगुलेशन 1956’ के तहत गुरुवार को 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार छह लोगों को बंबूनल्लाह के पास एक मछली पकड़ने वाले जहाज से गिरफ्तार किया गया। ये सभी जंगलीघाट के रहने वाले हैं। मछली पकड़ने वाली तीन यांत्रिक नौकाओं को हिरेन तिकेरी, बडाबालू और हावाबिल द्वीप में रोका गया तथा नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

मछली पकड़ने वाले जहाज और नौकाओं को जब्त कर लिया गया है। यह अभियान ओग्राब्राज पुलिस थाने के तहत पुलिस उपनिरीक्षक विनीत कुमार के निरीक्षण में 10 जनवरी से चलाया गया।
गहन तलाशी के दौरान हर्बटाबाद से हीरने तिर्की, झाउकोना, बादा बालू, लांबा बालू, बंबूनल्लाह और हवा बिल द्वीप को शामिल किया गया। काफी पीछा करने के बाद जहाज को रोका गया और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

उल्लेखनीय है कि जारवा जनजाति के महज 403 लोग जीवित हैं जो दक्षिणी अंडमान के जंगलों में रहते हैं। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों का जारवा महिलाओं के वीडियो क्लिप विवाद से कोई संबंध नहीं है। (भाषा)

 

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