स्कूलों को मान्यता देने का रास्ता साफ

मान्यता के फेर में अटके स्कूलों को ने अंततः राहत दे ही दी। आचार संहिता के दायरे में ढील देते हुए आयोग ने शिक्षा विभाग को मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू करने की इजाजत दे दी है।


विभाग अब के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर नई मान्यता जारी करने के साथ समयावधि भी बढ़ा सकते हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में शिक्षा सत्र जुलाई की जगह अप्रैल से प्रारंभ करने का प्रयोग तो कर लिया, लेकिन इसके लिए पहले से तैयारियॉं तक नहीं की गईं। एक ओर मान्यता की प्रक्रिया शुरू करने के लिए निर्वाचन आयोग से इजाजत माँगने की कार्रवाई होती रही तो दूसरी ओर छात्रों को आगामी कक्षा में प्राविधिक प्रवेश लेने का विकल्प भी दे दिया गया। जबकि कई स्कूलों की मान्यता वृद्घि तभी हो पाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैमाने पर खरा उतरेंगे। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी निरीक्षण कर कलेक्टर के जरिए प्रतिवेदन भेजेंगे।

माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों का कहना है कि कलेक्टर के माध्यम से मिलने वाले स्कूलों के निरीक्षण प्रतिवेदन के बिना मान्यता प्रकरण हल ही नहीं हो सकते हैं।

आचार संहिता लागू होने की वजह से जिलों से निरीक्षण प्रतिवेदन ही नहीं आ रहे थे। अब निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया शुरू करने की इजाजत दे दी है। जून के अंतिम सप्ताह तक स्कूलों की मान्यता का फैसला हो जाएगा।
शिकायत मिलने पर फोटोग्राफी : किसी स्कूल के संबंध में शिकायत मिलने पर उसकी न केवल जिले में मौजूद अधिकारियों से जॉंच कराई जाएगी बल्कि फोटोग्राफ भी खिंचवाए जाएँगे। इसका मूल्यांकन करने के बाद ही स्कूल के संबंध में कोई फैसला किया जाएगा।

लगेगा समय : मंडल सूत्रों का कहना है कि जिन स्कूलों की मान्यता के मामले में कोई विवाद नहीं होगा उनके आदेश तो जून के अंतिम सप्ताह में जारी कर दिए जाएँगे, लेकिन जिनको लेकर शिकायत या विवाद होगा उन पर फैसला जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जाएगा। पिछले साल भी जुलाई-अगस्त तक मान्यता देने का काम चलता रहा था।-नईदुनिया



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