धोनी के लिए ऊपरी क्रम में उतरना शुभ

7 जुलाई को जन्मदिन पर विशेष

PTI
7 जुलाई को अपना 28वाँ मनाने वाले भारतीय महेंद्रसिंह धोनी की परीकथा की तरह आगे बढ़े क्रिकेट करियर में उनका एकदिवसीय मैचों का बेजोड़ प्रदर्शन अहम रहा है, जहाँ में बल्लेबाजी करना इस विकेटकीपर बल्लेबाज के लिए हमेशा शुभ रहा।

धोनी ने हाल के दिनों में जब खुद शीर्ष क्रम विशेषकर तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने का फैसला किया तो उन्हें आलोचकों का निशाना भी बनना पड़ा लेकिन आँकड़े दिखाते हैं कि उन्होंने जब भी तीसरे या पाँचवें नंबर पर बल्लेबाजी की तब उन्होंने बेजोड़ प्रदर्शन किया और टीम को भी इसका फायदा मिला।

वेस्टइंडीज में रविवार को समाप्त हुई चार मैचों की श्रृंखला में भी धोनी ने खुद को शीर्ष पाँच बल्लेबाजों में शुमार किया और तीन पारियों में 91.00 की औसत से सर्वाधिक 182 रन बनाए। उनके इस प्रदर्शन से ने दूसरी बार कैरेबियाई सरजमीं पर श्रृंखला जीती और धोनी अपने करियर में चौथी बार 'मैन ऑफ द सिरीज' बने। इससे पहले उन्हें श्रीलंका के खिलाफ 2005 और 2008 तथा बांग्लादेश के खिलाफ 2007 में यह सम्मान हासिल हुआ था।

धोनी ने पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए मैच से खुद ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने का निर्णय किया और उसके बाद वे जिन 14 में से 11 मैच में तीसरे से पाँचवें नंबर तक बल्लेबाजी के लिए आए उनमें उन्होंने 86.57 की औसत से 606 रन बनाए, जिसमें कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ 94, न्यूजीलैंड के खिलाफ नैपियर में नाबाद 84 रन और वेस्टइंडीज के खिलाफ किंगस्टन में 95 रन की पारी शामिल है।

वैसे भी धोनी एकदिवसीय क्रिकेट में जब भी शीर्ष क्रम में खेलने के लिए उतरे तब उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। वनडे में उन्होंने चारों शतक (तीन भारत और एक एशिया एकादश की तरफ से) दूसरे, तीसरे या चौथे नंबर पर उतरकर जमाए हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ 2005 में विशाखापट्टनम में 148 रन और श्रीलंका के खिलाफ उसी वर्ष जयपुर में नाबाद 183 रन उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए बनाए थे।

धोनी वैसे सबसे अधिक 46 एकदिवसीय पारियों में छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे लेकिन इनमें उनका औसत 39.62 रहा जबकि तीसरे नंबर पर उन्होंने 14 पारियों में 86.50 की औसत से 865, चौथे नंबर पर 12 पारियों में 88.50 की औसत से 708 और पाँचवें नंबर पर 23 पारियों में 48.27 की औसत से 869 रन बनाए।

जहाँ तक वेस्टइंडीज दौरे का सवाल है तो वह धोनी ही नहीं बल्कि उनकी टीम के लिए भी संजीवनी साबित हुआ क्योंकि इंग्लैंड में ट्वेंटी-20 विश्वकप के सुपर आठ में तीनों मैच गँवाकर बाहर हो जाने से टीम को काफी आलोचनाएँ झेलनी पड़ रही थी। धोनी स्वयं इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन वेस्टइंडीज में उन्होंने दो मैच में विषम परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी की।

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
ग्रास आइलेट में खेला गया चौथा मैच द्विपक्षीय श्रृंखलाओं में उनका 100वाँ मैच था, जिसकी 89 पारियों में उन्होंने 51.54 की औसत से 3402 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और 23 अर्धशतक शामिल हैं।



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