कस्बे बन रहे क्रिकेट की सट्टेबाजी के नए गढ़

इंदौर| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 25 मार्च 2011 (19:36 IST)
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आईसीसी टूर्नामेंट के मैचों को लेकर बड़े पैमाने पर होने वाली संगठित सट्टेबाजी पश्चिमी मध्यप्रदेश के छोटे-छोटे कस्बों में अपने पैर जमा चुकी है। पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रदेश के कस्बों में सट्टेबाजी गिरोहों की धर-पकड़ से इस बात पर आधिकारिक मुहर लगती दिख रही है।


एक अधिकारी ने बताया कि मुखबिरों ने पहले ही आशंका जता दी थी कि क्रिकेट के महामुकाबले को ‘भुनाने’ के लितैयार सट्टा गिरोहों ने कानून की निगाहों से बचने की कोशिश के तहत खासकर छोटे शहरों, कस्बों और पर्यटक स्थलों में अड्डा जमा लिया है।
अब जबकि विश्वकप टूर्नामेंट अपनी पूरी रवानी में है, यह बात लगभग सही साबित होती लग रही है। यहाँ से करीब 80 किलोमीटर दूर धामनोद में कल 24 मार्च की रात 12 सट्टेबाजों की गिरफ्तारी को इसकी ताजा मिसाल के रूप में पेश किया जा सकता है।


पुलिस सूत्रों के मुताबिक नजदीकी धार जिले के इस कस्बे में आरोपियों से जब्त कागजात बताते हैं कि वे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गये विश्व कप क्वार्टर फाइनल पर लाखों रुपये के सट्टे की ‘बुकिंग’ कर चुके थे।

इससे पहले 17 मार्च को पुलिस ने से सटे महू में एक बुकी को गिरफ्तार किया था। इस दौरान श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच मुंबई में वानखेड़े स्टेडियम में खेले गये विश्व कप मैच पर लाखों रुपये के सट्टे का खुलासा हुआ था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, ‘हमें अपने मुखबिरों से सूचना मिली थी कि बड़े शहरों में पुलिस की विशेष सतर्कता और सख्ती के चलते सट्टा गिरोहों ने क्रिकेट विश्व कप से पहले ही छोटे शहरों, कस्बों और पर्यटक स्थलों में लम्बे समय के लिए किराये पर जगह बुक कर ली थी।’
पुलिस अधिकारी के मुताबिक गुजरे पाँच सालों के दौरान क्रिकेट मैचों पर सट्टा लगवाने वाले बड़े गिरोहों के तार पश्चिमी मध्यप्रदेश के महू, बड़वाह, धामनोद, कुक्षी और मनावर जैसे कस्बों से जुड़े पाए गए हैं। (भाषा)



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