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Written By भाषा

तेंडुलकर के विकेट से ज्यादा संतोष मिला:स्टेन

अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके भारत को पहले टेस्ट मैच में बैकफुट पर भेजने वाले दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने कहा कि सचिन तेंडुलकर और मुरली विजय के विकेट हासिल करके उन्हें अधिक संतोष मिला क्योंकि इसके पीछे उनकी खास रणनीति थी।

स्टेन ने कहा‍ कि तेंडुलकर का विकेट और उससे ठीक पहले विजय का विकेट खास था। मैंने विजय को आउट करने के लिए रणनीति बनाई और पहले उन्हें दो गेंद बाहर की तरफ की और अगली गेंद को अंदर की तरफ कराया। मैदान पर इस तरह यूँ ही ऐसा नहीं होता है। हमने वास्तव में इसके लिए रणनीति बनाई थी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्ररक्षण को सही तरह से जमाना महत्वपूर्ण था और इसलिए यह विकेट खास हैं। स्टेन ने कहा कि यह कप्तान के लिए चुनौती होती है कि वह इन खास गेंदों के लिये अपने क्षेत्ररक्षकों को सही पोजीशन पर खड़ा करे। इससे यह विकेट विशेष बन जाते हैं।

इस 26 वर्षीय तेज गेंदबाज ने कहा कि कोच कोरी वान जाइल दूसरे सत्र में गेंदबाजों के प्रदर्शन से खुश नहीं थे और चाय के विश्राम के दौरान उन्होंने गेंदबाजों से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा ‍कि कोरी ने चाय के विश्राम के दौरान हमसे बात की और कहा कि लंच के बाद का सत्र अच्छा नहीं रहा। हम मन-मुताबिक विकेट हासिल नहीं कर पाये और हमने कुछ रन भी दिए। उन्होंने हमसे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कहा।

स्टेन ने कहा कि चाय के बाद गेंद बदली गयी जो रिवर्स स्विंग ले रही थी और इससे उनकी टीम को फायदा मिला। उन्होंने कहा पहले वाली गेंद की सिलाई थोड़ी उधड़ गई थी इसलिए नई गेंद लेनी पड़ी, जिससे रिवर्स स्विंग मिल रहा था। हमारी रणनीति बहुत अच्छी रही। हमने अच्छी गेंदबाजी की।

टेस्ट मैचों में 200 विकेट से आठ विकेट दूर इस तेज गेंदबाज ने चाय के विश्राम के बाद 3.4 ओवर में तीन रन देकर पाँच विकेट लिए। उन्होंने कहा कि टीम के साथियों ने भारतीय परिस्थितियों और उन पिचों पर जहाँ बाद में मूवमेंट नहीं मिलता है, में रिवर्स स्विंग के महत्व के बारे में बात की थी।

उन्होंने कहा कि टेस्ट शुरू होने से पहले हमें बताया गया कि इस तरह की सपाट पिचों पर रिवर्स स्विंग की भूमिका अहम होती है। आपको विकेट से बहुत अधिक मूवमेंट नहीं मिलेगा। विकेट पर बहुत अधिक घास भी नहीं था। आपको हवा के जरिये ही गेंद को मूवमेंट देने की जरूरत थी।

स्टेन ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि पिच चाहे जोहान्सबर्ग की हो या नागपुर की, 145 किमी की रफ्तार से किया गया यॉर्कर हवा में 145 किमी की रफ्तार से ही जाएगा। हमारी रणनीति पूरी तेजी के साथ विकेट पर जोर से टप्पा मारना था। (भाषा)