अंपायर डाक्ट्रोव का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

दुबई| वार्ता|
कैरेबियाई अंपायर बिली डाक्ट्रोव ने से की घोषणा कर दी है। डाक्ट्रोव आईसीसी के एलीट पैनल के सदस्य थे और उनका इस महीने के अंत में खत्म हो रहा था।

डोमिनिका के डाक्ट्रोव को श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच वनडे और टेस्ट सिरीज में अंपायरिंग करना थी, लेकिन पारिवारिक समस्याओं के कारण उन्हें श्रीलंका से स्वदेश लौटना पड़ा था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच हेमिल्टन में खेले गए दूसरे टेस्ट में अंतिम बार अंपायरिंग की थी।

14 वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायर रहे डाक्ट्रोव ने कहा- काफी सोच-विचार के बाद मैंने चयनकर्ताओं को अपने संन्यास के बारे में सूचित कर दिया। मेरा 14 वर्ष का अंतरराष्ट्रीय करियर शानदार रहा और मैंने इस दौरान एक-एक पल का पूरा लुत्फ उठाया। यह यात्रा मेरे लिए किसी सपने जैसी थी। इस दौरान मैंने कई महान खिलाड़‍ियों को खेलते देखा।
उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि मैं क्रिकेट में तकनीक के आने से हुए बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा रहा। यह तकनीक आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अभिन्न हिस्सा है। साथ ही मैं क्रिकेट में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले ट्‍वेंटी-20 फार्मेट के आगमन का भी गवाह रहा, जिसने कि क्रिकेट को एक नए स्तर तक पहुंचा दिया है।

डाक्ट्रोव ने बतौर अंपायर अपना अंतरराष्ट्रीय करियर 1998 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच सेंट विंसेंट में हुए एक दिवसीय मैच से शुरू किया था। दो वर्ष बाद उन्हें वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच एंटीगा में खेले गए टेस्ट में क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में पहली बार अंपायरिंग का मौका मिला था।
कैरेबियाई अंपायर ने अपने 14 वर्ष के करियर में कुल 38 टेस्ट. 112 वनडे और 17 ट्‍वेंटी-20 मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच बारबाडोस में खेले गए आईसीसी ट्‍वेंटी-20 विश्वकप का फाइनल भी शामिल है। वे 2004 में आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय पैनल में शामिल किए गए थे और 2006 में उन्हें एलीट पैनल में प्रमोट किया गया था।

डाक्ट्रोव ने कहा कि आईसीसी ट्‍वेंटी-20 विश्वकप के फाइनल में अंपायरिंग करना मेरे लिए सबसे दुर्लभ क्षण था। मेरे पूरे करियर के दौरान परिजनों और दुनियाभर के प्रशंसकों ने मुझे जो समर्थन दिया, उसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं। साथ ही मैं आईसीसी और वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे इस शानदार खेल की सेवा करने के कई मौके दिए।
डाक्ट्रोव क्रिकेट ही नहीं, बल्कि फुटबॉल में भी रेफरी की भूमिका निभा चुके हैं। वे डोमिनिका के पहले फीफा रेफरी थे और उन्होंने 1995 से 1998 के बीच कैरेबियाई क्षेत्र में कई अंतरराष्ट्रीय मैचों में रेफरी की भूमिका निभाई थी।

वे 1996 में गुयाना और ग्रेनाडा के बीच हुए विश्वकप क्वालीफायर मैच में भी रेफरी थे। डाक्ट्रोव ने 1997 में फुटबॉल को अलविदा कह दिया था और अगले ही वर्ष वे क्रिकेट से जुड़ गए थे। (वार्ता)



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