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Written By WD

रोजगार की ‘सेज’

रोजगार की ‘सेज’
-अंकित श्रीवास्त
बेरोजगारी की समस्‍या के मूल में आधारभूत ढाँचा, नए अवसर के साथ उसका लगातार उपयोगिता में नहीं बने रहना बड़ा कारण रहा है। वर्ष 2006 से प्रभाव में आए विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी स्‍पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (सेज) से इसके काफी हद तक पूरा होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे लाखों लोगों को स्‍थायी रूप से रोजगार मुहैया तो होगा ही, साथ ही प्रत्यक्ष रूप से भी काम के कई अवसर सृजित होंगे।

हालाँकि बेरोजगारी की समस्‍या भारत में आजादी के साथ चली आ रही है, लेकिन सेज के मौजूदा प्रस्‍ताव के साथ इस बात के भी सुखद संकेत मिल रहे हैं कि इससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि भी होगी। वर्तमान में कार्यरत सेज में उद्योगकर्मियों ने रोजगार मुहैया करने के साथ ही उत्‍पादन की गुणवत्‍ता पर भी ध्‍यान दिया है। इसके सबसे अच्‍छा पहलू यह है कि इसमें अभी तक कुल रोजगार में 40 प्रतिशत महिलाओं को भागीदारी दी गई है।

एशिया में भारत पहला देश था, जिसने निर्यात के महत्‍व को जाना। सन् 1965 में गुजरात के कांडला में पहला ईपीज़ेड (एक्‍सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन) स्‍थापित किया गया, लेकिन इस दौरान कई तरह की परेशानियाँ भी सामने आईं। मसलन विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए जरूरी निषेध और पारदर्शिता में कमी, विश्‍वस्‍तरीय ढाँचे का अभाव, अस्थिर वित्‍तीय स्‍थिति आदि। इन खामियों से निजात पाने के लिए अप्रैल 2000 में सेज की घोषणा की गई।

इस नीति का मुख्‍य उद्‍देश्य गुणवत्‍तापूरक औद्योगिक ढाँचा मुहैया कराने के साथ आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्‍त करना है। इस नीति के अंतर्गत दूसरा पहलू विदेशी निवेश का मुँह भारत की ओर मोड़ना भी है। इन सभी तत्‍वों को ध्‍यान में रखकर संसद ने मई 2005 में विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम 2005 को मंजूरी दी, जिसे इसी वर्ष के 23 जून को राष्‍ट्रपति का अनुमोदन मिला। अधिनियम बनने के पहले इस पर गहन विचार किया गया था और इस पर लोगों की राय भी माँगी गई।

इन सभी पहलुओं पर विचार करने, सेज नियमों को शामिल करने के बाद अधिनियम 10 फरवरी 2006 से प्रभाव में आया। इसमें सभी नियमों का सरलीकरण किया गया और समय और ऊर्जा की बचत के लिए केंद्र और राज्‍य सरकार से संबंधित मामलों पर ‘सिंगल विंडो क्‍लीयरेंस’ को महत्‍व दिया गया।

सेज के महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों में अतिरिक्‍त आर्थिक गतिविधियाँ तैयार करना, वस्‍तुओं और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना, घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, आर्थिक आधारभूत ढाँचे का विकास करना और उससे भी महत्‍वपूर्ण रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की नीति शामिल है। यह माना जा रहा है कि सेज में घरेलू और विदेशी निवेश से आधारभूत ढाँचों में वृद्धि, अतिरिक्‍त आर्थिक गतिविधियों के सृजन और उत्‍पादन में वृद्धि से रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। ऐसी उम्‍मीद की जा रही कि अगले पाँच साल में सेज से 15 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

सेज महाराष्‍ट्र में सांताक्रूज, केरल में कोच्चि, गुजरात में काँडला और सूरत, तमिलनाडु में चेन्‍नई, आंध्रप्रदेश में विशाखापत्‍तनम, प. बंगाल में फाल्‍टा और उत्‍तरप्रदेश में नोएडा में वर्तमान में प्रस्‍तावित हैं। इसके साथ ही गुजरात में पोसितारा, महाराष्‍ट्र में नवी मुंबई और कोपाता, तमिलनाडु में नांनगुनेरी, प. बंगाल में साल्‍टलेक सिटी और कल्‍पी, उड़ीसा में पारादीप और गोपालपुर, उत्‍तरप्रदेश में भदोही, कानपुर, मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा, आंध्रप्रदेश में विशाखापत्‍तनम, काकीनाड़ा, केरल में वाल्‍लारपादम, पुथुव्‍यापीन, कर्नाटक में हासन, राजस्‍थान में जयपुर और जोधपुर का सरकारी मुहर लगना बाकी है।

यहाँ एक बात पर गौर करने की जरूरत है कि भारत के कुल क्षेत्रफल (2973190 वर्ग किमी) में से 54 फीसदी भाग (1620388 वर्ग किमी) कृषियोग्‍य भूमि है। वहीं नोटिफाएड 130 सेज के लिए करीब 177 वर्ग किमी जमीन का उपयोग किया गया है। दूसरी ओर 341 सेज, जिन्‍हें औपचारिक मंजूरी दी गई है, में भी मात्र 443 वर्ग किमी जमीन का उपयोग किया जाएगा।

नोटिफाएड 130 सेज के माध्‍यम से 17 लाख 43 हजार 530 लोगों को रोजगार मिलने की उम्‍मीद है। इस तरह से सेज गाँवों के बेरोजगार युवाओं के लिए वरदान साबित होगा। तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदूर में स्‍थापित सेज में नोकिया और फ्लेक्‍ट्रानिक कंपनियाँ क्रमश: 3800 और 2069 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। इसमें अधिकांश महिलाएँ हैं।
हैदराबाद के रत्‍न सेज में आभूषण निर्माण के काम में 2100 लड़कियों को रोजगार मिला है। ये लड़कियाँ भूमिहीन घरों की हैं। आंध्रप्रदेश के अपाचे सेज ने महीने में 10 लाख जूते बनाने का लक्ष्‍य रखा है। इससे 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। अभी यहाँ 2500 लोग काम कर रहे हैं। यहाँ की सर्विस सेक्‍टर में एक करोड़ वर्गमीटर से ज्‍यादा स्‍थान सेज के लिए नियोजित है। नेस्‍कॉम इसमें 12.5 लाख नौकरी सृजित करेगी। इससे यह उम्मीद की जा सकती है कि सेज से भारी मात्रा में रोजगार सृजित होंगे।

सेज के माध्‍यम से निर्यात, आधारभूत ढाँचा, रोजगार और निवेश के अवसरों में तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2007 के अंत तक इसमें लगभग एक लाख करोड़ रुपए तक का निवेश हुआ, जिसमें पाँच से छह बिलियन अमेर‍िकी डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश भी शामिल था।

सेज का रिपोर्ट कार्ड -
वर्ष..............निवेश मूल्य ( करोड़ में) .......विकास द
2003-2004........13,854 ..............................39%
2004-2005........18,314................................32%
2005-2006........22840...............................24.7%
2006-07...........34,787...............................52.3%

वर्ष 2007-08 में सभी सेज से 67088 करोड़ रुपए मूल्‍य के निवेश का लक्ष्‍य है। वर्ष 2005 के बाद से सेज में अभी तक 43123 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इससे 35053 लोगों को रोजगार मिला है। वहीं वर्ष 2009 के दिसंबर तक इसमें 2 लाख 56 हजार 159 करोड़ रुपए के निवेश की उम्‍मीद है, जिससे 17 लाख 43 हजार 530 रोजगार का अतिरिक्‍त सृजन होगा।

यदि सभी 341 सेज को अनुमति मिलती है तो 3 लाख करोड़ रुपए के निवेश से अतिरिक्‍त 4 लाख रोजगार के अवसर खुलेंगे। प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश ने इसमें लगातार महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की है, जिससे भारत के पास कपड़ा, ऑटो मोबाइल, स्‍टील, धातु, पेट्रोलियम उत्‍पाद के लिए विश्‍व बाजार का हब बनने का अवसर मिला है।

सेज नीति के अस्‍तित्‍व में आने के बाद से भारत में 14 सेज काम कर रहे हैं और 140 से ज्‍यादा को अनुमति मिल गई है। वर्तमान में सेज के अंतर्गत स्‍थापित 1087 इकाइयों में 1.85 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इसमें से 40 फीसदी महिलाएँ हैं। ये वो सेज इकाइयाँ हैं, जो अधिनियम के अस्‍तित्‍व में आने के पहले बन चुकी थीं।

सेज की स्‍थापना करमुक्‍त व्‍यापारिक जोन के रूप में की गई है। इसमें विदेशी कंपनियों को ट्रेड ऑपरेशन, कर और टैरिफ की आसान शर्त के कारण आकर्षित करने के लिए मदद मिलने की संभावना है। कोई भी प्राइवेट, पब्‍लिक, ज्‍वाइंट सेक्‍टर या राज्‍य सरकार या इसकी एजेंसी सेज खोल सकती है। साथ ही विदेशी कंपनियाँ भी सेज खोलने के लिए स्‍वतंत्र हैं।

सेज के विकास के लिए सभी कच्‍चे माल, सीमेंट से लेकर इस्‍पात तक पर करों और किसी प्रकार के शुल्‍क की छूट होगी। सेज का कम से कम 25 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक विकास के लिए सुनिश्‍चित होना चाहिए और शेष 75 प्रतिशत क्षेत्र का प्रयोग आर्थिक और सामाजिक संरचना के लिए किया जाना चाहिए। इसके लिए दी गईं रियायतें सभी क्षेत्र पर लागू होंगी।

सेज में 7500 मकान, 100 कमरे का होटल, 25 बिस्‍तरों का अस्‍पताल, स्‍कूलों, शैक्षणिक संस्‍थाओं और 50 हजार वर्गमीटर क्षेत्र का मल्‍टीप्‍लैक्‍स की भी इजाजत होगी। इससे भी रोजगार के अवसरों में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होगी।
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