वीडियो गेमिंग में बनाएं मजेदार कैरियर

जयंतीलाल भंडारी

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मनोरंजन और खेल के नाम से अब मैदानी भाग-दौड़ ही मस्तिष्क में नहीं आती, कंप्यूटर ने उसे घर बैठे दिमागी भाग-दौड़ का खेल बना दिया है। शहरी परिवेश में पले-बढ़े बच्चे आज गुल्ली-डंडा, कबड्डी, खो-खो जैसे खेलों से वाफिक हों या न हों लेकिन सुपर मारियो, सुपर कान्ट्रा, बॉम्बर मैन जैसे वीडियो गेमों से वे भली-भांति परिचित होते हैं


जिस तेजी से वीडियो गेम की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, उसी तेजी से उद्योग भी फल-फूल रहा है। नए-नए वीडियो गेमों के लिए नई-नई तकनीकें भी ईजाद की जा रही हैं। जिन कहानियों को बच्चे कभी अपनी दादी-नानी से सुना करते थे, उन्हीं कहानियों को अब वीडियो गेम्स के जरिए बच्चों के लिए जीवंत कर दिया गया है। वीडियो गेमिंग के जरिए बच्चे सुपर हीरो के साथ-साथ अपने हाथ-पैर चला सकते हैं। दुश्मनों से दो-दो हाथ कर सकते हैं। यही कारण है कि वीडियो गेम्स में बच्चों की रुचि लगातार बढ़ती जा रही है और इसी के साथ नए-नए गेम्स की मांग भी बढ़ती जा रही है।
वीडियो गेम के निर्माण की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। वीडियो गेमों का निर्माण मल्टीमीडिया, ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के प्रयोग द्वारा तैयार किया जाता है। एक बड़े कंप्यूटर गेम का निर्माण करने में कई अनुभवी एवं दक्ष लोगों की टीम को महीनों लग सकते हैं।

आजकल वीडियो गेम्स को अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाने लगा है। सबसे पहले वीडियो गेम्स की स्क्रिप्ट में लिखित रूप में यह तय कर लिया जाता है कि गेम में कौन से पात्र डाले जाएं तथा कैसे दृश्य निर्मित किए जाएं। इसके बाद स्टोरी बोर्ड तैयार किया जाता है, जिसमें सभी संभावित दृश्यों के फ्रेम तैयार किए जाते हैं। इसके बाद एडोब फोटोशॉप सॉफ्टवेयर में 2-डी तथा फोटोमैक्स सॉफ्टवेयर में 3-डी एनिमेटेड चित्र बनाए जाते हैं।

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इन चित्रों में एक्सएसआई जैसे सॉफ्टवेयर की मदद से गति उत्पन्न की जाती है। इसके बाद गेमिंग इंजन की मदद से एनिमेटेड इमेज को की-बोर्ड तथा माउस की सहायता से नियंत्रित किया जाता है। गेम इंजन में लिखे कमांड से ही कंप्यूटर के किसी बटन को दबाने से गोली चलती है या एनिमेटेड इमेज आगे-पीछे, ऊपर-नीचे बढ़ती है।
वीडियो गेम्स को सामान्यतः चार भागों में बांटा जाता है। एक्स बॉक्स गेम्स, कंप्यूटर गेम्स, मोबाइल गेम्स तथा थिएटर गेम्स। एक्स बॉक्स गेम्स में एक मशीन को तार द्वारा टीवी स्क्रीन से जोड़ा जाता है। कंप्यूटर गेम्स को कंप्यूटर पर सीडी या इंटरनेट की मदद से लोड किया जाता है। मोबाइल गेम्स का फार्मेट कंप्यूटर गेम्स से मिलता-जुलता ही होता है लेकिन सेट छोटा हो जाता है।
थिएटर गेम्स बड़े-बड़े एम्यूजमेंट पार्क, मल्टीप्लेक्स तथा मॉल्स में लगाए जाते हैं। गौरतलब है कि वीडियो गेम बनाने की प्रक्रिया वैज्ञानिक ज्ञान, कलात्मक एवं रचनात्मक क्षमता का अनोखा मिश्रण है। यह ज्यादा वक्त लेने वाला काम है, इसलिए वीडियो गेम के निर्माण में कलात्मक प्रतिभा, दिमागी कौशल ही नहीं बल्कि धैर्य का होना भी बहुत आवश्यक है।
वीडियो गेम डिजाइनिंग में करियर बनाने हेतु रचनात्मक अभिरुचि के अलावा कंप्यूटर गेम खेलने का शौक भी होना चाहिए। चूंकि गेमिंग कंप्यूटर एनिमेशन क्षेत्र की ही एक नई शाखा है इसलिए पहले एनिमेशन के एक्सपर्ट ही गेम डेवलपमेंट का कार्य किया करते थे लेकिन गेमिंग बाजार की बढ़ती मांग और नए गेमिंग सॉफ्टवेयर के विकास ने गेमिंग को एक नए अध्ययन क्षेत्र के रूप में विकसित कर दिया है। वीडियो गेमिंग के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम कनाडा में होता है। अब भारत में भी इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में गेमिंग में डिप्लोमा या एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रम कराया जाता है।
वीडियो गेम डिजाइनिंग सिखाने वाले संस्थानों में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार का स्नातक होना आवश्यक है। कुछ संस्थान एनिमेशन तथा मल्टीमीडिया के कोर्स के दौरान ही गेमिंग की जानकारी देते हैं। इन सभी कोर्सों की अवधि एक से दो वर्ष होती है। कोर्स के दौरान ड्राइंग, डिजाइनिंग, प्रोडक्शन, प्रोग्रामिंग, लाइटिंग के साथ-साथ एनिमेशन व डिजिटल आर्ट्स सिखाई जाती है।
गेम डेवलपमेंट में लाइफ ड्राइंग तथा स्कल्पचर जैसी कलाओं को समझना भी जरूरी होता है। वीडियो गेमिंग के पाठ्यक्रम के दौरान सभी संस्थान छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क देते हैं, जिसके तहत उन्हें एक छोटा गेम तैयार करना होता है। कोर्स में छात्रों को यूं तो गेम डेवलपमेंट की पूरी जानकारी दी जाती है लेकिन कोर्स के दौरान ही छात्र अपनी रुचि का क्षेत्र चुन लेते हैं और बाद में इसी क्षेत्र के विशेषज्ञ बनते हैं। वैसे भी आज बाजार में विशेषज्ञ की ही डिमांड है।
कंप्यूटर के प्रयोग के कारण भारत में गेमिंग उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार भारत में आज करीब पचास हजार गेमिंग प्रोफेशनल्स की जरूरत है लेकिन मात्र दस से पंद्रह फीसदी प्रोफेशनल्स ही बाजार में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गेमिंग मार्केट में गेम डेवलपर, गेम प्रोग्रामर, गेम ऑथर, एनिमेटर, ग्राफिक डिजाइनर, स्कल्पचर, गेम लाइटिंग व साउंड एक्सपर्ट की जबर्दस्त मांग है।
देश में अभी गेम डेवलपमेंट के क्षेत्र में इंडिया गेम्स, ध्रुव इंटरैक्टिव, पाराडौक्स, वी-बीइंग जैसी कुछ प्रमुख कंपनियां काम कर रही हैं। इसके अलावा सोनी, ईए जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां भी भारत में अपनी दस्तक दे चुकी हैं। भविष्य में इन्हीं कंपनियों में कॅरिअर की अपार संभावनाएं प्रोफेशनल्स तलाश सकते हैं। भारत में गेमिंग उद्योग के तेजी से पनपने की प्रमुख वजह गेम डेवलपमेंट पर अन्य देशों के मुकाबले कम पैसा खर्च होना है।
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यहां से करें कोर्स
- नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन पाल्दी, अहमदाबाद।
- सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया, चंडीगढ़।
- फॉर्च्यून इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, केरल।
- माया एकेडमी ऑफ एडवांस सिनेमेटिक्स, मुंबई।



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