अल्लाह तआला के 99 नाम

संकलन : श्रीमती अनीसा बेगम


57. अल्‌-ह़मीद (प्रशंसनीय)
जो व्यक्ति 45 दिन तक बराबर एकांत में या हमीद 93 बार पढ़े उसकी सारी बुरी आदतें दूर हो जाएँगी।

58. अल्‌-मु़ह़सी (गणना करने वाला)

जो व्यक्ति रोटी के 20 टुकड़ों पर रोजाना या मु़ह़सी पढ़कर फूँके और खाए तो सारी सृष्टि उससे प्रेम करने लगे।

59. अल्‌-मुब्दी (पहली बार पैदा करने वाला)जो व्यक्ति प्रातः समय गर्भवती स्त्री के पेट पर हाथ रखकर 99 बार या मुब्दी पढ़ेगा उसका गर्भ न तो गिरेगा और न समय से पहले शिशु पैदा होगा।

60. अल्‌-मु'ईद (दोबारा पैदा करने वाला)
खोए हुए व्यक्ति को वापस लाने के लिए जब घर के सब लोग सो जाएँ, तो घर के चारों कोनों में 70-70 बार या मु'ईद पढ़ें, इन्शा अल्लाह सात दिन में वापस आ जाए या पता चल जाए।
61. अल्‌-मु़हयी (जीवित करने वाला)
जो व्यक्ति बीमार हो वह या मु़हयी पढ़े या किसी दूसरे बीमार पर फूँके तो रोग मुक्त हो। जो व्यक्ति 89 बार पढ़ अपने ऊपर फूँके, हर प्रकार की कैद से सुरक्षित रहे।

62. अल्‌-मुमीत (मृत्यु देने वाला)
जिस व्यक्ति का मन वश में न हो वह सोते समय सीने पर हाथ रखकर या मुमीत पढ़ते-पढ़ते सो जाए, मन वश में हो जाए।
63. अल्‌-ह़ैय्य (सदैव जीवित रहने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना 3000 बार या ह़ैय्य पढ़े कभी बीमार न हो। जो व्यक्ति चीनी के बर्तन पर केसर व गुलाब से लिखकर पानी से धोकर पिए या पिलाए, रोग मुक्त हो।

64. अल्‌-क़ैय्यूम (सबको क़ायम रखने और संभालने वाला)
जो व्यक्ति अनगिनत या क़ैय्यूम पढ़े तो लोगों में उसका आदर व साख हो। यदि एकांत में बैठकर पढ़े, धनी हो जाए। जो व्यक्ति फ़ज्र की नमाज़ (सुबह की नमाज़) के बाद से सूर्य निकलने तक या ह़ैय्यो या क़ैय्यूम पढ़े उसकी सुस्ती दूर हो।
65. अल्‌-वाजिद (हर वस्तु को पाने वाला)
जो व्यक्ति खाना खाते समय या वाजिद पढ़े उसके मन में शक्ति, बल तथा प्रकाश उत्पन्न हो।

66. अल्‌-माज़िद (आदरणीय)
जो व्यक्ति एकांत में या माज़िद इतना पढ़े कि मूर्छित (बेख़ुद) हो जाए तो उसके मन में अल्लाह के रहस्य प्रकट होने लगें। यदि खाने पर पढ़कर खाएँ तो शक्ति प्राप्त हो।
67. अल्‌-वा़हिदुल अहद (एक अकेला)
जो व्यक्ति रोजाना 1000 बार या वा़िहदुल अहद पढ़ा करे उसके दिल से भय जाता रहे और प्रेम उत्पन्न हो। जिसके औलाद न हो वह लिखकर पास रखे इन्शा अल्लाह औलाद हो।

68. अस्‌-स़मद (जिसकी कोई इच्छा न हो)
जो व्यक्ति प्रातः समय सजदे में सर रखकर 115 या 125 बार या ़समद पढ़े उसको हर प्रकार सचाई प्राप्त हो। वज़ू करके पढ़े तो किसी अन्य की कोई आवश्यकता न रहे। जब तक पढ़ता रहे भूख का असर न हो।
69. अल्‌-क़ादिर (सबसे शक्तिमान)
जो व्यक्ति दो रकत पढ़कर 1000 बार या क़ादिर पढ़े उसके शत्रुओं का विनाश हो (यदि वह सत्य पर हो)। यदि किसी कार्य में बाधा आती हो तो 41 बार पढ़े इन्शा अल्लाह बाधा दूर होगी।

70. अल्‌-मुक़्तदिर (कुदरत वाला)जो व्यक्ति सोकर उठने के बाद अनगिनत या मुक़्तदिर पढ़े या कम से कम 20 बार पढ़े उसके सारे काम सरल व ठीक हो जाएँ।

71. अल्‌-मुक़द्दिम (पहले और आगे करने वाला)
जो व्यक्ति लड़ाई के समय या मुक़द्दिम पढ़ता रहे अल्लाह त'आला उसे शत्रु से आगे व सुरक्षित रखेगा। जो व्यक्ति हर समय पढ़ता रहे अल्लाह त'आला का आज्ञाकारी बन जाएगा।
72. अल्‌-मुअख़्ख़िर (पीछे और बाद में रखने वाला)
जो व्यक्ति या मुअख़्ख़िर पढ़ता रहे उसे सच्ची तौबा प्राप्त हो। जो व्यक्ति 100 बार रोज पढ़ा करे उसके मन को अल्लाह त'आला का प्रेम प्राप्त हो।

73. अल्‌-अव्वल (सबसे पहले)
जिस व्यक्ति के पुत्र उत्पन्न न होता हो वह 40 दिन तक 40 बार रोज या अव्वल पढ़े, पुत्र उत्पन्न हो। जो यात्री जुमे (शुक्रवार) के दिन 100 बार पढ़े जल्द सकुशल वापस आए।
74. अल्‌-आख़िर (सबके बाद)
जो व्यक्ति रोज 1000 बार या आख़िर पढ़े उसके मन से अल्लाह के अतिरिक्त सब का प्रेम मिट जाए तथा इन्शा अल्लाह सारी उम्र के पापों का प्रायश्चित हो जाए और सुखद जीवन अन्त (मृत्यु) हो।

75. अज़्‌-ज़ाहिर (सामने)
जो व्यक्ति नमाज जुमा के बाद 500 बार या या ज़ाहिर पढ़े उसके मन में अल्लाह का नूर (प्रकाश) उत्पन्न हो।
76. अल्‌-बा़तिन (गुप्त)
जो व्यक्ति 33 बार रोजाना या बा़ितन पढ़ा करे उस पर गुप्त रहस्य प्रकट होने लगें तथा अल्लाह का प्रेम उसके मन में पैदा हो। जो व्यक्ति दो रकत नमाज पढ़कर हो वल्‌ अव्वलो वल्‌ आख़िरो वज़्ज़ाहिरो वल्‌ बा़ितनो व हु-व' अला कुल्ले शैइन क़दीर पढ़ा करे इन्शा अल्लाह उसकी सारी इच्छाएँ पूरी होंगी।
निःसंदेह अलाह त'आला इन्साफ करने वालों से प्रेम करते हैं।

77. अल्‌-वाली (काम बनाने वाला)
जो व्यक्ति या वाली पढ़ा करे प्राकृतिक आपदाओं (कुदरती आफतों) से सुरक्षित रहे। मिट्टी की कोरी सकोरी में लिखकर पानी भरकर मकान में छिड़के तो मकान सुरक्षित रहे। यदि 11 बार पढ़कर किसी पर फूँके तो आज्ञाकारी हो।
78. अल्‌ मु-त-'आली (सबसे महान व ऊँचा)
जो व्यक्ति अनगिनत या मु-त'-आली पढ़ा करे उसके समस्त कष्ट दूर हो जाएँ। जो स्त्री मासिक धर्म के समय में पढ़े उसका कष्ट दूर हो।

80. अल्‌-बर्र (बड़ा अच्छा व्यवहार करने वाला)
जो व्यक्ति शराब पीता हो, बलात्कार आदि बुरी आदतों में पड़ा हो रोजाना 7 बार या बर्र पढ़े, पापों से उसका मन हट जाएगा। यदि बच्चे के पैदा होते ही 7 बार पढ़कर उस पर फूँकें तो बड़े होने तक समस्त आपदाओं (मुसीबतों) से सुरक्षित रहे।
और जिस पर चाहेगा अल्लाह त'आला तवज्जह भी फरमा देगा और अल्लाह त'आला बड़े ज्ञान वाले और बड़े बुद्धिमान हैं।

80. अत्‌-तव्वाब (क्षमा देने वाला)
जो व्यक्ति चाश्त की नमाज़ के बाद 360 बार ग तव्वाब पढ़े उसे सच्ची तौबा प्राप्त हो। अनगित पढ़े, उसके सारे कार्य सफल हों। यदि किसी जालिम पर 10 बार पढ़े तो उससे सुरक्षा प्राप्त हो।
तुम (सब) को अल्लाह ही के पास जाना है और वह वस्तु पर पूरी कुदरत रखते हैं।

81. अल्‌-मुन्तक़िम (बदला लेने वाला)
जो व्यक्ति सत्य पर हो और शत्रु से बदला लेने की शक्ति न रखता हो तीन जुमे (शुक्रवार) तक या मुन्तक़िम अनगिनत पढ़े, अल्लाह त'आला खुद बदला लेंगे।

82. अल्‌-'अफ़ूव्व (बहुत क्षमा करने वाला)जो व्यक्ति अनगिनत या 'अफ़ूव्व पढ़े अल्लाह त'आला उसे पाप मुक्त कर देंगे।

83. अर्‌-रऊफ़ (बहुत बड़ा दयालु)
जो व्यक्ति अनगिनत या रऊफ़ पढ़े सृष्टि (मख़लूक़) उस पर दयावान हो और सृष्टि पर। रोजाना 10 बार दरूद शरीफ़ व 10 बार पढ़े तो क्रोध दूर हो। दूसरे क्रोधी व्यक्ति पर पढ़े तो उसका क्रोध दूर हो।
84. मालिक-उल्‌-मुल्क (सम्राटों का सम्राट)
जो व्यक्ति या मालिक-अल्‌-मुल्क सदैव पढ़ता रहे अल्लाह त'आला उसको धनी कर देंगे और वह किसी का आश्रित न रहेगा।

85. ज़ुल्‌ जलाल-ए-वल्‌ इकराम (महानता व इनाम देने वाला)
जो व्यक्ति अनगिनत 'या ज़ल जलाल-ए-वल्‌ इकराम' पढ़े अल्लाह उसको आदर-सत्कार एवं उन्नति देंगे। यदि या ज़ल जलाल ए वल्‌इकराम बेयदे कल्‌ खैर व अन्‌ त अला कुल्ले शै इन क़दीर 100 बार पढ़कर पानी पर फूँककर रोगी को पिलाएँ तो वह रोग मुक्त हो।
86. अल्‌-मुक़सित (न्याय करने वाला)
जो व्यक्ति रोजाना या मुक़सित 100 बार पढ़ा करे वह शैतान से सुरक्षित रहेगा। यदि 700 बार रोज पढ़े तो जो इच्छा हो, पूर्ण हो।

अल्लाह तआला के 99 नाम

87. अल्‌-जाम्‌ए' (सबको इकट्ठा करने वाला)
जिस व्यक्ति के परिवारजन या साथी बिछुड़ गए हों वह फ़ज्र के साथ स्नान करके आकाश की ओर मुँह करके 10 बार या जामे' पढ़े और एक उँगली बन्द करे। इसी प्रकार हर 10 बार पर एक उँगली बन्द करता जाए। अन्त में दोनों हाथ, मुँह पर फेरे, सब जमा हो जाएँ। यदि कोई वस्तु खो जाए तो अल्लाह-हुम्मा या जामे 'अन्नास-ए-ले यौमिल्ला-रै-ब-फ़ीह-ए-इज्‌-म'धाल्‌लती पढ़ा करे वह वस्तु मिल जाए। सच्चे प्रेम के लिए भी यह दुआ प्रमाण है।
88. अल्‌-ग़नी (आत्म निर्भर)
जो व्यक्ति रोजाना 70 बार या ग़नी पढ़े वह धनी होगा और किसी का आश्रित न रहे। किसी आंतरिक या बाह्य रोग का रोगी अपने शरीर पर या ग़नी पढ़कर फूँके तो रोग मुक्त हो।

89. अल्‌-मुग़नी (धनी बनाने वाला)
जो व्यक्ति पहले व बाद में 11-11 बार दरूद शरीफ और 1111 बार या मुग़नी पढ़े वह धनी व स्वस्थ होगा। फ़ज्र की नमाज़ के बाद या इशा की नमाज़ के बाद सूरत मुज़म्मिल के साथ पढ़े। जो व्यक्ति दस जुमे (शुक्रवार) तक रोज 1000 बार या मुग़नी पढ़े किसी पर आश्रित न रहे। (कुछ सूफ़ियों ने 10 बार कहा है।)
आप कह दीजिए कि अल्लाह ही हर वस्तु का बनाने वाला है और वही एक है, शक्तिमान है।

90. अल्‌-मान्‌ ए' (रोक देने वाला)
यदि पत्नी से झगड़ा हो तो बिस्तर पर लेटते समय 20 बार या मान्‌ ए' पढ़ें, झगड़ा दूर हो। आपस में प्रेम बढ़े। अनगिनत पढ़े तो हर कष्ट से सुरक्षित हो। इच्छा पूर्ति हो।
91. अध-धार्र (हानि पहुँचाने वाला)
जो व्यक्ति जुमे (शुक्रवार) की रात्रि में 100 बार या धार्र पढ़े वह समस्त आपदाओं (मुसीबतों) से सुरक्षित रहे। उन्नति पाए।

92. अन्‌-नाफ़ए' (लाभ देने वाला)
जो व्यक्ति कश्ती या सवारी में सवार होने के बाद या नाफ़ए' पढ़ता रहे, सुरक्षित रहे। यदि किसी भी कार्य आरंभ से पूर्व 41 बार पढ़े कार्य इच्छा अनुसार पूर्ण हो। यदि पत्नी मिलन के समय पढ़े औलाद आज्ञाकारी व नेक प्राप्त हो।
93. अन्‌-नूर (प्रकाशवान)
जो व्यक्ति शुक्रवार (जुमा) की रात में 7 बार सूरत नूर और 1000 बार या नूर पढ़ा करे उसका मन प्रकाश से भर जाए।

94. अल्‌-हादी (सीधा रास्ता दिखाने वाला)
जो व्यक्ति हाथ उठाकर आकाश की ओर मुँह करके या हादी पढ़े और मुँह पर हाथ फेरे उसे मार्गदर्शन मिले। जो व्यक्ति 1100 बार या हादी ए हेदे नस्सि रातल मुस्तक़ीम इशा की नमाज के बाद पढ़ा करे, उसकी कोई इच्छा बाकी न रहे।
उसके अतिरिक्त किसी अन्य की इबादत (भक्ति) नहीं। वह अतिमहान है अति बुद्धिमान।

95. अल्‌-बदी' (अद्वितीय वस्तुओं का आविष्कार करने वाला)
जिस व्यक्ति को कोई दुःख या कष्ट आए 1000 बार या बदी-अस-समा-वात्‌-ऐ-वल्‌-अर्ध पढ़े, कष्ट दूर हों।यदि या बदी' पढ़ते-पढ़ते सो जाए, जिस काम का विचार हो, स्वप्न में दिखाई दे। जो व्यक्ति 1200 बार 12 दिन तक या बदी-अल्‌-'अजाइब्‌-ए-बिल्‌ख़ैरे-या बदी' पढ़े उसकी इच्छा पूरा पढ़ने से पहले पूरी हो।
96. अल्‌-बाक़ी (सदैव शेष रहने वाला)
जो व्यक्ति शुक्रवार (जुमा) की रात को इशा की नमाज के बाद 100 बार या बाक़ी पढ़े उसके सारे नेक काम अल्लाह त'आला स्वीकार कर लेंगे तथा वह हर प्रकार के कष्ट व हानि से सुरक्षित रहेगा।

97. अल्‌-वारिस (सबके बाद मौजूद रहने वाला)
जो व्यक्ति सूर्योदय के समय 100 बार या वारिस पढ़े, हर दुःख दर्द से सुरक्षित रहे, दीर्घायु हो तथा सुखद जीवन अन्त हो। जो व्यक्ति मग़रिब व इशा के बीच 1000 बार पढ़े हर प्रकार की हैरानी व परेशानी से सुरक्षा पाए।
98. अर्‌-रशीद (सत्यपथ का मार्गदर्शक)
जो व्यक्ति कार्य या इच्छा की तरकीब न जाने वह मग़रिब और इशा के बीच 1000 बार या रशीद पढ़े, स्वप्न में तरकीब नजर आए या मन में आ जाए। यदि रोजाना पढ़े तो समस्त कठिनाइयाँ दूर हों और व्यापार में वृद्धि हो। इशा के बाद 100 बार पढ़ें तो सब कार्य स्वीकार हों।

99. अस्‌-स़बूर (बहुत विनम्र)जो व्यक्ति सूर्योदय से पहले 100 बार या स़बूर पढ़े वह उस दिन कष्ट से सुरक्षा पाए। शत्रुओं तथा ईर्ष्यालुओं (हासिद) के मुख बंद रहें। जो व्यक्ति किसी दुःख में हो वह 1020 बार पढ़े, दूर हो।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलइहिवसल्लम ने फरमाया कि अल्लाह त'आला के 99 नाम हैं, जिसने उन्हें याद किया वह जन्नत में जाएगा।



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