दुबई की मस्त लाइफस्टाइल

नियम सख्त, लाइफस्टाइल मस्त

<a class="storyTags" href="/search?cx=015955889424990834868:ptvgsjrogw0&cof=FORID:9&ie=UTF-8&sa=search&siteurl=//hindi.webdunia.com&q=%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A4%88" target="_blank">दुबई </a>की होटल अटलांटिस
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कोई इसे मिडिल ईस्ट का 'पेरिस' कहता है तो कोई ग्लोबल सिटी। किसी की नजर में यह एक अलहदा बिजनेस सेंटर है तो किसी के लिए 'ए ब्यूटीफुल ट्रेवल डेस्टिनेशन'। यहाँ बात हो रही है संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शहर दुबई की। बीते दिनों वहाँ आयोजित हुए भारतीय ट्रेवल एजेंट्स के एक कन्वेंशन में शिरकत करने का मौका मिला। इसी दौरान दुबई को करीब से जाना।

दुबई में हैं अनेक भारतीय :
यहाँ आने के बाद ऊँची-ऊँची इमारतें, आधुनिक जीवनशैली, इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून-कायदों को देख लगा कि हम विदेश में हैं लेकिन जब लोगों से बात की तो हर तरफ भारतीयता का अहसास हुआ। यहाँ भारत के लोग बहुतायत में हैं। किसी भी टैक्सी में बैठ जाएँ, ड्राइवर हिन्दी बोलता है।

किसी भी होटल में चले जाएँ, वेटर को हिन्दी आती है और किसी भी शॉपकीपर या उसके हेल्पर को हिन्दी बोलते देखा जा सकता है। ज्यादातर भारतीय यहाँ किसी उच्च पद पर काम नहीं करते लेकिन पगार भारत के रईसों जैसी पाते हैं। वैसे कई भारतीय यहाँ अपना बिजनेस कर रहे हैं और कई अपनी प्रतिभा के बल पर दुबई वासियों को मोहित कर रहे हैं। इसके अलावा यहाँ पाकिस्तान, फिलीपींस और मलेशिया के लोगों की संख्या भी कम नहीं।

जमीन को अदब :
दुबई में आपको इधर-उधर थूकते लोग नहीं दिखेंगे। यह सिर्फ साफ-सफाई बनाए रखने के लिए नहीं है बल्कि यहाँ के नियमों में ही है। साठ के दशक में यहाँ की जमीन में तेल की खोज की गई थी, तभी से यहाँ जमीन को अदब देने के लिए उस पर कोई थूकता या गंदगी नहीं करता। दुबईवासियों का मानना है कि इस तेल के कारण ही तो दुबई इस ऊँचाई पर है। इसका सम्मान तो हर पल किया जाना चाहिए।

दुबई
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हजारों रुपए की चालानी कार्रवाई :
यहाँ ट्रैफिक को लेकर काफी सख्ती है। कोई भी वाहन चालक नियम तोड़ने में घबराता है। यहाँ भारतीय परम्परानुसार 'पुलिस वाले' को हरा या पीला नोट पकड़ाकर आगे बढ़ने का कन्सेप्ट ही नहीं है। पुलिस कहीं नजर नहीं आती, हर जगह कैमरे लगे हैं। जहाँ नियम तोड़ा वहाँ के फोटो, समय के साथ, क्या गलती की उसका चालान आपके घर पहुँच जाता है।

साल के अंत में ऐसे सारे चालानों को भरना जरूरी होता है वरना आगे वाहन चलाने के लिए एनओसी नहीं मिलती। यह चालानी राशि चंद रुपयों में नहीं होती बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों की कई महीनों की तनख्वाह तक पहुँच जाती है।

प्री पेड टोल टैक्स :
यहाँ आपकी गाड़ी पर प्री पेड टोल टैक्स का कार्ड लगा होना जरूरी है। कई रास्तों पर टोल टैक्स बार लगे हुए हैं। जब भी आपकी गाड़ी उनके नीचे से गुजरेगी, स्वतः ही उस कार्ड में से दो या चार दिरहम (1 दिरहम 14 भारतीय रुपए के लगभग) कम होता जाता है।

यदि प्री पेड कार्ड नहीं है तो इससे पचास गुना ज्यादा की राशि का चालान बन जाता है। प्रत्येक सड़क पर वाहन चालकों के लिए स्पीड निर्धारित है। स्पीड कम या ज्यादा होने पर कैमरे और चालानी राशि आपके इंतजार में रहती है।

दुबई का सौंदर्य
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कोई हॉर्न नहीं बजाता :
यहाँ करीब एक हफ्ता रहा लेकिन कभी किसी गाड़ी का हॉर्न नहीं सुना। दुबई में किसी का हॉर्न बजाना आगे चल रहे चालक को गाली समान लगता है।

सभी इतने व्यवस्थित चलते हैं कि हॉर्न बजाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस कारण यहाँ सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता।

नौकरी मिलना आसान, लाइसेंस नहीं :
कहा जाता है कि दुबई में नौकरी मिलना आसान है लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस नहीं। यहाँ हर तीन साल में लाइसेंस रिन्यू करवाना पड़ता है। पहली बार लाइसेंस लेने में बहुत से टेस्ट और शुल्क देना होता है। यदि आप गाड़ी खरीदने जा रहे हैं तो लाइसेंस होना बेहद जरूरी है। बिना लाइसेंस के शोरूम मैनेजर गाड़ी की टेस्ट ड्राइव भी नहीं देता।

पैदल चलने वालों को प्राथमिकता :
दुबई में बाजारों को छोड़ दें तो मुख्य मार्गों पर इक्का-दुक्का पैदल यात्री दिखाई देते हैं। बावजूद इसके उनके लिए ट्रैफिक नियमों में काफी आसानी है। हर जेब्रा क्रॉसिंग से पहले एक स्विच लगा है जिसे दबाकर मुख्य मार्ग के ट्रैफिक को रोका जा सकता है। रोड क्रॉस करने के बाद स्विच दबाकर उस मार्ग पर ग्रीन सिग्नल पुनः ऑन किया जा सकता है।

बस स्टॉप भी एयरकंडीशंड :
दुबई में गर्मी काफी पड़ती है। सितंबर-अक्टूबर में यहाँ का तापमान 38 से 42 डिग्री तक चला गया था। यहाँ प्रत्येक इमारत, कार, बस में एयरकंडीशनर होता है। यहाँ तक कि सड़कों पर बने बस स्टॉप भी एयरकंडीशंड होते हैं।

याद आ जाता है भारत :
भले ही दुबई बहुत आधुनिक शहर है, नियमों ने इसे काफी स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया है, लेकिन भारत की याद यहाँ भी आ जाती है। जहाँ हम भारत में किसी को पानी पिलाना पुण्य मानते हैं, वहीं दुबई में सार्वजनिक रूप से पानी देखना भी मुश्किल है।

किसी मॉल में जाएँ या फिर रेस्तराँ में, पानी हर जगह खरीदना पड़ता है। सभी जगह पानी का अलग-अलग मूल्य है। आधा लीटर पानी के कई जगह 200 रुपए तक चुकाने पड़ते हैं। हमें यहाँ अपने घरों में 'फ्री स्टाइल' रहना तब खलता है जब बालकनी में कपड़े सुखाने पर नगर-निगम चालान बना जाता है।

दुबई के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी :
-संयुक्त अरब अमीरात 7 शहरों से मिलकर बना है और उन्हीं में से एक शहर है दुबई।
-दुनिया की सबसे ऊँची मानी जाने वाली इमारत 'बुर्ज दुबई' यहाँ है। इसमें 164 फ्लोर हैं और लंबाई लगभग 800 मीटर है।
- यहाँ लेफ्ट हेंड ड्राइव है। सभी चालक सड़क के दाहिनी ओर से चलते हैं।
- यहाँ पेट्रोल गेलन से मिलता है। भारतीय रुपए के अनुसार करीब 15 रुपए लीटर।
- 09-09-2009 को यहाँ मेट्रो ट्रैन सेवा की शुरुआत हुई।
- यहाँ शेखों का राज है और वर्तमान में शेख मोहम्मद अल मकतूम यहाँ के रुरल हैं।
- यहाँ पुरुष के लिए 'शेख' और महिला के लिए 'शेखा' का उपयोग नाम के पहले किया जाता है।
- यहाँ की सड़कों पर केवल कार ही दिखती हैं। इक्का दुक्का बाइक सवार या तो पेपर बाँटने वाले हॉकर होते हैं या फूड डिलीवर करने वाले।
WD|
- शमी कुरैशी
- यहाँ पानी से ज्यादा सस्ती कोल्ड्रिंक पड़ती हैं।



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