46 वर्षों से जारी हैं 'राम नाम धुन'

सांप्रदायिक सद्‍भाव की अनूठी मिसाल

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सिर्फ एक चौके की जरूरत है। लगातार चौबीस घंटे और हफ्ते के सातों दिन तक चलने वाले की 'हाफ सेंचुरी' पूरी हो जाएगी लेकिन इसके पूरा होने में चार साल लगेंगे। के में एक अगस्त 1964 से जो राम नाम का शुरू हुआ है, वह अब तक एक क्षण के लिए भी नहीं रुका है। राम नाम धुन का इस मंदिर का 46 वर्ष का यह रिकॉर्ड 'गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो गया है।

इस कभी न टूटने वाले 'रिकॉर्ड' की बात क्रिकेट की भाषा में इसलिए की जा रही है क्योंकि नामचीन क्रिकेटर अजय जडेजा इसी शहर के हैं। इसी शहर के राज परिवार ने क्रिकेट की रणजी ट्रॉफी शुरू की थी। पूरे देश से 'ग्लोबल बर्ड वाचर्स कांफ्रेंस' में भाग लेने आए देश विदेश के 700 से अधिक परिंदों के पारखी भी भक्तिभाव के इस रिकॉर्ड से विस्मित हुए बिना नहीं रह सके।

शहर के एक मुसलमान ने जीते जी हर दिन इस रामधुन में भाग लेकर सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल भी पेश की है। शहर के ऐतिहासिक रणमल झील (लखोटा झील) के किनारे स्थित बाला हनुमान मंदिर में रोज आने वाले भक्त भी क्रिकेट की भाषा में ही बात करते हैं।

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पिछले एक दशक से भी अधिक समय से लगभग हर दिन इस राम नाम धुन में भाग लेने आने वाले 47 वर्षीय अरविंद पांड्या कहते हैं - राम नाम धुन की हाफ सेंचुरी होने में चार साल बाकी है। राम ने चाहा तो सेंचुरी भी बनेगी । यहाँ ऐसे भक्तों की कमी नहीं है जो भूकंप आ जाए या सुनामी, राम नाम धुन को जारी रखने के लिए पिच पर डटे रहेंगे।

भक्ति के 'पिच' पर डटे रहने के धैर्य की इंतिहा यह है कि गुजरात में 26 जनवरी 2001 को जब विनाशकारी भूकंप आया तो भी यह रामधुन बदस्तूर जारी रही। इस 'नॉन स्टॉप' को प्रेभ भिक्षु महाराज ने शुरू किया था। उनके बाद 85 वर्षीय देवदत्त बाबू ने इसे जारी रखने का बीड़ा उठाया। मंदिर में कीर्तन करने वालों के पास देवदत्त बाबू एक कुर्सी पर बैठे ध्यान में लीन थे।

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- धनंजय
इस मंदिर से जुड़ा एक प्रसंग सांप्रदायिक सद्‍भाव की बड़ी सीख देता है। एक मुसलमान मामद साहब जब तक जीवित रहे और शहर में रहे, रामधनु में भाग जरूर लेते रहे।



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