योग करो मुँहासे हटाओ

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आधुनिक जीवनशैली और खानपान के प्रति लापरवाही से मुँहासों में इजाफा होता है। क्रीम या लोशन प्राथमिक उपचार कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकालीन फायदा लेना हो तो योग से बढ़कर कुछ नहीं।

अधिकांश युवाओं को मुँहासों से परेशानी होती है। चेहरे का आकर्षण कम हो जाता है। अनेक बाह्य उपायों से चेहरे के मुँहासे समाप्त करने की दवाइयाँ, लोशन, क्रीम आदि लगाने के उपरांत भी विशेष लाभ नहीं होता।

प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विशेषज्ञों के अनुसार इसका प्रमुख कारण कब्जियत है। इसके अतिरिक्त व्यायाम का भी अभाव होता है। युवाओं में व्यायाम के प्रति अरुचि तथा आलस्य होता है। योगाभ्यास मुँहासों की रोकथाम के लिए अति उपयुक्त होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में सादे पानी से चेहरे को दिन में तीन-चार बार धोने के पश्चात चेहरा पोंछे बिना ही सूखने दिया जाए, इससे चेहरे का तेल घुल जाता है और मुँहासों का उभरना कम हो जाता है।

ये हैं कारगर उपाय
तीस दिन में एक बार दीर्घ शंखप्रक्षालन करना चाहिए। इसके अंतर्गत 20 से 25 गिलास गर्म पानी में नमक-नींबू मिलाकर (हृदय रोगी तथा उच्च रक्तचाप वाले नहीं करें) प्रातःकाल उठते ही यह पानी 4 गिलास पीकर तीर्यकताड़ासन, कटिचक्रासन, उदरार्कशणासन एवं तीर्यक भुजंगासन 10-10 बार करने के बाद शौच के लिए जाना चाहिए।

उपरांत फिर 3-4 गिलास वही पानी पीकर टहलने के बाद पुनः शौच को जाना चाहिए। इस प्रकार 4-5 बार शौच जाने एवं पानी पीने से गुदाद्वार से पिया हुआ पानी निकलने लगता है इस क्रिया में लगभग डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। इसके पश्चात संपूर्ण दिन विश्राम करें और भूख लगने पर ही घी-खिचड़ी का सेवन करें।

अग्निसार करने के लिए खड़े होकर घुटनों को हल्का मोड़कर सामने झुकते हुए हाथों को घुटनों पर रखें, सामने देखते हुए श्वास बाहर निकालकर बाह्य कुंभक करें और जब तक श्वास बाहर रुकी रहती है, तब तक पेट को गहराई से आगे-पीछे चलाए, लगभग 25-30 बार पेटको चलाने के बाद खड़े होकर 4-5 बार लंबा गहरा श्वास-प्रश्वास करें, उपरांत क्रिया को 4-5 बार दोहराना चाहिए।

- डॉ. बीके बांद्रे
शशकासन करने के लिए दोनों घुटने मोड़कर जमीन पर आसन बिछाकर बैठे और पैरों के पंजों को फैलाते हुए एड़ियों को बाहर की तरफ झुकाते हुए पुट्ठों को रखकर बैठे इसे व्रजासन कहते हैं। इसके उपरांत दोनों हाथों को ऊपर उठाकर सामने झुके और दोनों हाथों को जमीन पर फैलाएँ ताकि कोहनियाँ सीधी रहें। नाक या माथा जमीन पर बिना पुट्ठे उठाए लगाने की चेष्टा करें। 20-25 श्वास-प्रश्वास होने तक इस आसन की स्थिति में रुके फिर ऊपर उठे, एक बार इसे दोहराएँ।



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