विश्वास की डोर न हो कभी कमजोर

अकेला चना नहीं फोड़ सकता है भाड़

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विश्वास की डोर न हो कभी कमजोर : कहते हैं कि उम्मीद पर ही दुनिया कायम है। किसान बादलों पर विश्वास करता है और हम सीमा पर खड़े अपने जवानों पर विश्वास करते हैं। नेता मतदाताओं पर विश्वास करता है और नियोक्ता अपने कर्मचारियों पर विश्वास करता है। यदि कोई काम टीम वर्क द्वारा किया जा रहा हो तो टीम के सभी सदस्यों को एक-दूसरे की क्षमता पर विश्वास होना चाहिए। मतभेद होने पर उनके बीच झगड़े की नौबत आएगी, जो टीम को एकजुट बनाए रखने में बाधक बन सकता है।

विश्वास की यह डोर टीम के सभी सदस्यों के नैतिक आचरण और बर्ताव से भी जुड़ी है। एक भी सदस्य अगर गलत काम करता है तो या तो उसका विरोध होगा या वह टीम से बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन यदि टीम मैनेजमेंट अच्छा है तो इसकी नौबत ही नहीं आएगी क्योंकि टीम मैनेजमेंट से विश्वास बढ़ता है और इसी विश्वास से सहकर्मियों की आस भी बढ़ती है। इसलिए विश्वास की डोर कभी भी कमजोर न पड़ने दें।

बेहतर टीम बेहतर परिणाम : क्या आपने कभी आसमान में उड़ते पंछियों का झुंड देखा है? क्या कभी आपने सोचा है कि वे समूहों में क्यों उड़ते हैं? यह भी शायद कभी आपके दिमाग में नहीं आया होगा कि वे रात के घने अँधेरे में अपना रास्ता कैसे ढूँढ लेते हैं? मैनेजेमेंट के पहलू से सोचा जाए तो यह सब बेहतर टीम वर्क और टीम मैनेजमेंट से संभव है।
  कहते हैं कि उम्मीद पर ही दुनिया कायम है। किसान बादलों पर विश्वास करता है और हम सीमा पर खड़े अपने जवानों पर विश्वास करते हैं। नेता मतदाताओं पर विश्वास करता है और नियोक्ता अपने कर्मचारियों पर विश्वास करता है।      


अकेला चना नहीं फोड़ सकता है भाड़ : किसी भी काम को करने के लिए एक अच्छी टीम का होना उतना ही जरूरी है जिस तरह से किसी रथ को खींचने के लिए समान कद-काठी के एक ही दिशा में चलने वाले घोड़ों का होना आवश्यक है, उसी तरह एक अच्छी टीम बनाने के लिए सभी सदस्यों में कुछ गुणों की समानता बहुत जरूरी है।

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यह फलसफा ठीक उसी तरह का है जैसे पाँच घोड़े रथ को एक ही दिशा में तभी खींच सकते हैं जब उसके सारथी को सभी घोड़ों को हाँकने की कला आती हो। यह कला और कुछ नहीं टीम मैनेजमेंट या लीडरशिप ही तो है। रथ की लगाम उसी व्यक्ति के हाथहो सकती है, जिसमें टीम मैनेजमेंट का गुण हो।



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