गुरुमंत्र : लीडर से पहले बनें अच्छे सदस्य

अनुराग तागड़े

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टीम भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को मेहनत तो करना ही पड़ती है साथ ही त्याग भी करना पड़ता है। दोस्ती-यारी की बात हो या फिर ऑफिस में काम करने की बात हो, जब तक सभी लोगों में एकजुट रहने की बात नहीं होगी तब तक यथोचित परिणाम नहीं आ पाएंगे। यह बात समझना जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति टीम लीडर नहीं बन सकता और उसे टीम का सदस्य बनना ही होगा।


कई बार यह स्थिति आती है कि लोग टीम लीडर नहीं बन पाते तो खेल बिगाड़ने की बात करते हैं। इस प्रकार की स्थिति ऑफिस में भी आ सकती है और जब सामूहिक तौर पर काम करने की बात होती है तब भी सामने आती है। कोई भी व्यक्ति आसानी से टीम का सदस्य नहीं बनता बल्कि उसका प्रयत्न होता है कि वह सीधे लीडर ही बने।

दरअसल टीम का सदस्य बने रहना या बनना अपने आप में काफी अलग तरह की सोच का परिणाम होता है। टीम का सदस्य बनकर अपना सर्वश्रेष्ठ देना और फिर भी लीडर बनने की अपेक्षा सदस्य बने रहना अपने आप में त्याग और समझदारी की मांग करती है।

यहां उन पक्षियों का उदाहरण देना बिल्कुल सामयिक होगा जो आकाश में उंचाइयों पर समूह में उड़ते हैं और वी का आकार बनाकर चलते हैं ताकि सभी को कम दबाव सहन करना पड़े और संपूर्ण समूह आसानी से उड़ते जाए। इन पक्षियों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहती है कि अगर कोई भी सदस्य थक जाता है तब तत्काल दूसरा आकर उसका स्थान लेता है। इतना ही नहीं अगर कोई पक्षी थक जाने के कारण या अन्य कारणों से नीचे आ जाता है तब दो-तीन अन्य साथी भी उसके साथ नीचे आते हैं और जब तक वह ठीक नहीं हो जाता उसी के साथ रहते हैं।

जब सभी को यह लगता है कि पुनः उड़ान भरना चाहिए तब नए समूह के साथ फिर से वे वी आकार बनाकर उड़ जाते हैं। सामूहिकता केवल त्याग और मेहनत नहीं बल्कि ऐसी सोच मांगती है जिसमें दूसरे की सफलता में स्वयं की सफलता देखना होती है और असफलता में भी स्वयं की असफलता देखना होती है। सामूहिकता की भावना को आत्मसात करने के लिए सुख दुःख का अनुभव असफलता को पास से देखने और उससे सीख लेने की प्रवृत्ति विकसित करना पड़ती है।
ढेर सारी मेहनत करने के बाद भी अगर हमें असफलता हाथ लगती है तब हम उन कारणों को ढूंढने लगते हैं जिससे असफलता मिली है। यह कारण हम ही अपने बारे में तय कर लेते हैं अगर हम सामूहिकता में विश्वास रखते हैं तब हमारे स्वयं के बारे आकलन दूसरों को करने के लिए कहना चाहिए तभी हम स्वयं के बारे में असलियत जान पाएंगे और अपनी स्वयं की गलतियों से हमारा परिचय हो पाएगा। अगर आप टीम के अच्छे सदस्य के रूप में अपनी पहचान कायम कर लेते हैं तब इसका परिणाम काफी अलग हो सकता है।
सभी लीडर चाहते हैं कि उनकी टीम में बेहतरीन लोग हों जो संपूर्ण टीम को आगे बढ़ाने की बात सोचते हों। दोस्तों अगर आप टीम में काम कर रहे हैं तब स्वार्थ और चाटुकारिता को भूलकर मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का प्रयत्न करेंगे तब न केवल अच्छे टीम के सदस्य कहलाएंगे बल्कि नाम भी खूब कमाएंगे।



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