कैसे आया आधुनिक मेकअप

मेकअप
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दुनिया में विभिन्न देशों में :

रोम में : यहाँ पर सौंदर्य प्रसाधनों का आविष्कार विशेष रूप से दासियों के लिए किया गया। इन दासियों को यहाँ पर "कासमेट" कहकर बुलाया जाता था।

पश्चिम एशिया में : पर्शिया (ईरान) में उपयोग में लाए जाते थे। अरब आदिम जातियों द्वारा इस्लाम अपना लिए जाने से यह क्षेत्र इस्लामिक शासन के अंतर्गत आ गया।


चीन में : लोग विभिन्न रंग अपने नाखूनों पर लगाते थे। ये रंग वहाँ के विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते थे। चू राजवंश के लोग सोने-चाँदी के रंग के निशान लगाते थे। उनके बाद आने वाला वर्ग लाल और काले रंग के निशान लगाता था। निम्न वर्ग के लोगों के लिए नाखूनों में भड़कीले रंगों का प्रयोग वर्जित था।

इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि मनुष्य की सौंदर्य पिपासा कोई बंधन नहीं मानती। चाहे ये बंधन सामाजिक हों, कानूनी हों या भावी शारीरिक दुष्प्रभावों के हों। इन सबके रहते हुए भी मानव किसी भी युग में इनके प्रयोग से नहीं चूका।
जापान में : नर्तकियाँ एक विशेष फूल साफ्लावर को मसलकर अपने होठों को रंगती थीं तथा इसकी पंखुड़ियों से अपने आँखों के किनारों को सजाती थीं।

योरप में : यहाँ मेकअप को चर्च द्वारा अनैतिक समझा जाता था। लेकिन योरप में हुए धर्म सुधार आंदोलन और औद्योगिक क्रांति के बाद लोगों की इस धारणा में बदलाव आया।

उच्च वर्ग की महिलाएँ अपनी त्वचा को सँवारने के लिए सफेद सीसे का इस्तेमाल करती थीं। इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम इसका प्रयोग करती थीं। उनसे प्रभावित होकर इंग्लैंड में युवा वर्ग ने इसके भारी दुष्प्रभावों को नजरअंदाज करते हुए इसका जमकर प्रयोग किया।

इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि मनुष्य की सौंदर्य पिपासा कोई बंधन नहीं मानती। चाहे ये बंधन सामाजिक हों, कानूनी हों या भावी शारीरिक दुष्प्रभावों के हों। इन सबके रहते हुए भी मानव किसी भी युग में इनके प्रयोग से नहीं चूका। आज जैसे आकर्षक पैंकिंग में भले ही सौंदर्य उत्पाद इतिहास में विद्यमान न रहे हों, पर यह निश्चयपूर्वक कहा जा सकता है कि सौंदर्यवर्धक उत्पादों का इतिहास मनुष्य जितना ही प्राचीन है।

सबसे पहले मेकअप का प्रयोग :

सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग का पहला पुरातात्विक सबूत प्राचीन इजिप्ट(मिस्र) में लगभग चार हजार ईसा पूर्व मिलता है। प्राचीन समय में ग्रीस और रोम में भी सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग होता था। प्राचीन मिस्रवासियों ने आँखों की बाहरी सजावट के लिए एक विधि ईजाद की थी जिसे सीसा, ताँबा और जले हुए बादाम व अन्य पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाता था। इसे कोल कहा जाता था।

सौंदर्य
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इसके बारे में मान्यता थी कि इसे लगाने से बुरी आत्मा का प्रकोप नहीं होता है और यह नजरों को तेज करता है। इसलिए इसका प्रयोग इजिप्ट में गरीब लोग भी करते थे। मिस्र की महारानी क्लियोपेट्रा के अप्रतिम सौंदर्य का राज उनके लिए विशेष प्रकार से तैयार की गई मेकअप सामग्री थी। क्लियोपेट्रा की लिपस्टिक को एक विशेष प्रकार के लाल कीड़े से बनाया जाता था जो गहरे लाल रंग का होता था। इसमें चीटियों के अंडे भी मिलाए जाते थे।


भारत में : यहाँ सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग का पहला पुरातात्विक सबूत 1931 में प्राप्त हुआ। सिंध प्रांत के चंहुदड़ो में सिंधुवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली लिपस्टिक मिली। एक उत्खनन कार्य ने एकाएक भारत के इतिहास को अधिक गौरवशाली बना दिया कि 2500 से 1750 ईसा पूर्व मानी जानी वाली यह भारतीय सभ्यता किसी भी मायने में मिस्र और रोम की सभ्यता से पीछे नहीं थी।

मिस्र की महारानी क्लियोपेट्रा के अप्रतिम सौंदर्य का राज उनके लिए विशेष प्रकार से तैयार की गई मेकअप सामग्री थी। क्लियोपेट्रा की लिपस्टिक को एक विशेष प्रकार के लाल कीड़े से बनाया जाता था जो गहरे लाल रंग का होता था। इसमें चीटियों के अंडे भी मिलाए जाते थे
मेहँदी का प्रयोग चौथी-पाँचवीं शताब्दी में भीकिया जाता था। हालाँकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हो पाई। मेहँदी का प्रयोग आज की तरह हेयरडाई और हाथों-पाँवों को सजाने के लिए भी किया जाता था। उत्तरी अफ्रीकी संस्कृति में भी मेहँदी का महत्व था। हिन्दुओं में प्राचीन समय से ही काजल का भी महत्व था। आधुनिक मेकअप को जन्म देने का श्रेय मैक्स फैक्टर को है।

इनका जन्म पोलैंड के लॉड्ज में 1877 में हुआ। उनके व्यवसाय की शुरुआत 1902 में अमेरिका में हुई जब वे सेंट लुईस में हुए वर्ल्ड फेयर में परिवार सहित शामिल हुए। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में उन्होंने बालों से संबंधित वस्तुएँ और त्वचा को चिकनाई देने वाली वस्तुएँ सेंट लुइस के स्थानीय कलाकारों को बेचना शुरू की। इस प्रकार उनकी शुरुआती छवि स्थापित हुई।

इससे विकसित हो रही फिल्म इंडस्ट्री के उदीयमान कलाकार उनसे मेकअप संबंधी सलाह लेने आने लगे। सन्‌ 1909 में जैसे ही में सवाक फिल्मों की शुरुआत हुई, वे सपरिवार लॉस एंजिल्स आ गए और एक थिएटर में नौकरी कर ली। 1994 तक वे फिल्मों में मेकअप के कार्य में पूरी तरह निपुण हो चुके थे।

उन्होंने त्वचा को चिकनी बनाने के लिए एक नए शुष्क क्रीम का विकास किया जिसके द्वारा फिल्मों में पहली बार मेकअप किया गया। इसकी मदद से अब नायिकाएँ फिल्मों में अधिक अच्छे में आ सकीं। इसके बाद पलकों के लिए आइब्रो पेंसिल, होठों की चमक का सामान, मेकअप टिकिया आदि स्क्रीन मेकअप के कॉस्मेटिक्स की एक नई शब्दावली ही विकसित हो गई।

फिल्मों में अपने नए और स्टाइलिश मेकअप से अभिभूत अभिनेत्रियाँ अपनी निजी जिंदगी में भी दिखावे और स्टाइल के लिए मेकअप का प्रयोग करने लगीं। फिल्मों के ग्लैमरस लुक को देखते हुए महिलाओं में उनके सुंदर दिखने के कारणों की पूछताछ होने लगी। इस प्रकार मैक्स फैक्टर का कार्य धीरे-धीरे आम जनजीवन में भी प्रभावी हो गया।

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- सोनाक्षी ठाकुर
इसे देखते हुए सन्‌ 1927 में मैक्स ने फिल्म जगत से अलग आम लोगों के लिए अपना पहला कॉस्मेटिक उत्पाद बेचने के लिए बाजार में उतारा। मैक्स के आने के पहले भी कुछ महिलाएँ कॉस्मेटिक उत्पादों का उपयोग करती थीं। लेकिन मैक्स फैक्टर के आने के बाद कॉस्मेटिक आसानी से उपयोग और दुरुपयोग के लिए उपलब्ध हो गया। आज भी बहुत सारे प्रसाधनों में इसका इस्तेमाल होता है।

 

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