सोयाबीन के स्वास्थ्य लाभ एवं घरेलू उत्पाद

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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने सोयाबीन को गोल्डनबीन की उपाधि दी, क्योंकि यह पौष्टिक तत्वों से परिपूर्ण है और स्वास्थ्य संबंधी लाभों के लिए उपयुक्त है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जो कि दालों में सर्वाधिक है। प्रोटीन उत्तम गुणवत्ता व कम कीमत का है। इसके प्रोटीन में सभी आवश्यक अमिनो-अम्ल मनुष्य के लिए उपयुक्त मात्रा व अनुपात में उपस्थित हैं। सोयाबीन में 20 प्रतिशत वसा होती है, जिसमें ओमेगा-6 एवं ओमेगा-3 वसीय अम्ल अधिक मात्रा में पाए जाते हैं और ये अम्ल हृदय रोगी के लिए अतिउत्तम होते हैं।

एनिमिया में लाभकारी
सोयाबीन में कैल्शियम व लोहा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण यह महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है। गाय व भैंस के दूध में लोहा ना के बराबर पाया जाता है। सोयाबीन का सेवन उन महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है, जो कि एनिमिया (हीमोग्लोबिन की कमी) या ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी कमजोर होना) नामक बीमारियों से पीड़ित होती हैं।
सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में लैक्टोज नामक शुगर भी नहीं होता है। इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उन बच्चों/ मनुष्यों, जो कि दूध या दूध से बने बने खाद्य पदार्थ नहीं खा सकते हैं या पेट में गैस की समस्या से पीड़ित रहते हैं, के लिए यह बहुत ही उपयोगी पाया जाता है। यह समस्या उन बच्चों/मनुष्यों में होती है जिनकी पाचन नली में लैक्टोज एन्जाइम की कमी होती है।
सोयाबीन में कार्बोहाइड्रेड की मात्रा लगभग 20-25 प्रतिशत होती है और स्टार्च की मात्रा नहीं के बराबर होती है। इसी कारण इसकी दाल अन्य दालों की तरह नहीं बनती है। इस में लगभग 10 प्रश छिल्का पाया जाता है तथा उसका रेशा उत्तम गुणवत्ता का होता है, क्योंकि इसमें घुलनशील व अघुलनशील दोनों रेशे पाए जाते हैं।

सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों का ग्लोसेमिक इन्डेक्स (कर्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलने की क्षमता) अन्य खाद्य पदार्थों में सबसे कम है। जिसके कारण इससे बने खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रोल रहित होते हैं तथा इसकी वसा में पाली अनसेचुरेटिंड वसीय अम्लों की मात्रा अधिक पाई जाती है, अतः इसे हृदय रोगियों के लिए अच्छा माना गया है।
जिन औरतों में रजोनिवृत्ति हो चुकी है। (पोस्ट मीनोपॉज) उसमें नाइट्रोजन की कमी के कारण हड्डियों में कैल्शियम की कमी आ जाती है तथा हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। जिससे हड्डियाँ टूटने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। सोयाबीन के खाद्य पदार्थों का सेवन करने से हड्डियों में तत्वों की सघनता बढ़ जाती है तथा हड्डियों को मजूबती मिलती है।

प्रोस्टेट कैंसर रोकने में सहायक सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में आइसोफ्लेवोन नामक फाइटोरसायन उपस्थित होते हैं। इन रसायनों के विभिन्न महत्व पाए गए हैं। वे शरीर में कैंसर के प्रतिरोधक का कार्य भी करते हैं, खासतौर पर स्तन व प्रोस्ट्रेट कैंसर में। महिलाओं में 45 से 50 वर्ष की आयु के पश्चात रजोनिवृत्ति (मोनीपॉज) की समस्या प्रारंभ हो जाती है। जिसके लक्षण हैं एक दम से रात में पसीना आना, चिड़चिड़ापन होना, मुँह का लाल व गर्म हो जाना इत्यादि। पचास ग्राम सोयाबीन प्रतिदिन के हिसाब से उपयोग में लाने पर महिलाएँ इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं। (नईदुनिया)

 

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