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वर दे, वीणावादिनि वर दे !

Written By WD
Updated: सोमवार, 19 जनवरी 2015 (14:45 IST)
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वर दे, वीणावादिनि वर दे !

प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव

भारत में भर दे !

 

काट अंध-उर के बंधन-स्तर...

बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;

कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर

जगमग जग कर दे !

 

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव

नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;

नव नभ के नव विहग-वृंद को

नव पर, नव स्वर दे !

 

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

 


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