आरती गजबदन विनायक की....

श्री गणेशजी की आरती

 

आरती गजबदन विनायक की

सुर मुनि पूजित गणनायक की। टेक।

 

एकदंत शशिभाल गजानन,

विघ्नविनाशन शुभगुण कानन,

शिवसुत बंधमान-चतुरानन,

दुख विनाशक सुखदायक की। सुर...

 

ऋद्धि-सिद्धि‍ स्वामी समर्थ अति,

विमल बुद्धिदाता सुविमल मति,

आद्य-वन दहन, अमल ‍‍अविगत गति,

विद्या-विनय, विभवदायक की। सुर...

 

पिंगल नयन, विशाल शुंडधर,

धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश कर,

लम्बोदर बाधा विपत्ति हर,

सुर-वंदित सब विधिलायक की। सुर...

 

 




और भी पढ़ें :