ramcharitmanas
✕

चाँद की जमीं पर लहराया तिरंगा

गरिमा माहेश्वरी

Written By WD
Updated: रविवार, 28 दिसंबर 2008 (16:22 IST)
भारत के लिए 2008 एक मिश्रित फलदायी साल रहा है। चाहे हम किसी भी क्षेत्र की बात करें- राजनीति से लेकर तकनीक तक भारत ने अगर कुछ खोया है तो दूसरी ओर बड़ी उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। चंद्रमा की सतह पर जैसे ही भारतीय ध्वज लहराने की सूचना देशवासियों को मिली उनका ‍सिर फख्र से ऊँचा हो गया। चंद्र अभियानों के इतिहास में देश की इस शानदार उपलब्धि ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल कर दिया है जो चाँद को छूने का इतिहास कायम कर चुके हैं।

जाने-माने भारतीय गणितज्ञ आर्य भट्ट ने 1500 साल पहले चाँद की दूरी तथा उसके आकार को सटीक तौर पर मापा था। आज पीएसएलवी सी-11 के जरिये चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण से आर्य भट्ट की खोज साकार हो गई है। यह सिर्फ इसरो के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए एक बड़ी सफलता है।

चंद्रयान-1 का सफर इतना आसान भी नहीं रहा। भारत ने पहली बार चाँद की जमीनी हकीकत जानने के लिए अपना मून मिशन चंद्रयान-1 आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के सतीश धवन स्पेस सेंटर से रवाना किया।

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से यूकेलिप्टस के झुरमुटों से हवा को चीरता पीएसएलवी सी-11 जब आकाश की ओर बढ़ा तो भारत सफलतापूर्वक चंद्र अभियान भेजने वाला विश्व का छठा देश बन गया। इसकी सफलता के साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसने चाँद पर अपना नेशनल फ्लैग भेजा है। चाँद की जमीन पर चंद्रयान को पहुँचने में 15 दिनों का समय लगा।

पीएसएलवी के प्रदर्शन और सफलता दर को देखते हुए चंद्रयान-1 के लिए इसके उन्नत संस्करण को चुना गया था। चाँद के लिए इस सफर में चंद्रयान ने लगभग 4 लाख किलोमीटर की यात्रा तय की। चंद्रयान-1 में कोई भी यात्री नहीं भेजा गया सिर्फ शोध के लिए जानकारी इकट्ठा करने वाले उपकरण ही भेजे गए थे।

अपने अभियान के लिए चंद्रयान ने 22 अक्टूबर 2008 को प्रात: 6.20 बजे उड़ान भरी और पूरे देश में इसकी कामयाबी के लिए प्रार्थनाएँ हुईं। जैसे-जैसे यह यान आगे बढ़ा, इस अभियान की सफलता साफ नजर आने लगी।

कैसा था यह चंद्रयान :

चंद्रयान-1 का वजन करीब 1380 किलो है। यह मारुति-800 कार के आकार का यान है। इसमें 11 पे-लोड लगाए गए हैं, जिसमें क्षेत्र मापने वाला स्टीरियो कैमरा, हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा, लुनर लेजर रेजिंग उपकरण, उच्च शक्ति वाला एक्स-रे स्पेटोमीटर, मून इंपेक्ट प्रोव जैसे उपकरण भी शामिल हैं। इसमें सबसे खास उपकरण है 'मून इम्पेक्टर प्रोब'। इसी मून इम्पेक्टर प्रोब ने चाँद के बारे में जानकारियाँ उपलब्ध कराईं और साथ ही चाँद की सतह की पहली तस्वीरें भी इसी के जरिये हमें प्राप्त हुईं।

इसके अलावा रदरफोर्ड एपलेटन लैब ब्रिटेन और इसरो के गठजोड़ से चंद्रयान-1 एक्स-रे स्पेक्टोमीटर, जर्मनी का नियर इंफ्रा रेड स्पेक्टोमीटर, स्वीडन का उपनाभिकीय अन्वेषक, बल्गारिया का रेडिएशन डोज मॉनिटर, अमेरिका के नासा का मिनिएचर सिन्थेटिक एपर्चर राडार तथा अमेरिका के मून मिनरोलाजी मैपर जैसे उपकरण भी लगाए गए थे।

सूचनाएँ जो चंद्रयान ने दीं :

NDND
चंद्रयान अपने अभियान के दौरान चंद्रमा कक्षा में दो वर्षों की यात्रा करेगा। यात्रा के दौरान यह चंद्रमा के ध्रुवीय प्रदेशों में खनिज और रेडियोधर्मी तत्वों का पता लगाएगा और उसकी मिट्टी का अध्ययन करेगा। यह यान चंद्रमा की सतह तथा इस उपग्रह पर जल की संभावना का पता लगाने के लिए बनाया गया,‍ जिसकी तस्वीरें पृथ्वी पर सफलतापूर्वक भेजी गईं।

जमीन से चंद्रयान-1 पर डीप स्पेस स्टेशन (डीएसएन), स्पेसक्राफ्ट कंट्रोल सेंटर (एसएससी) तथा इंडियन स्पेश साइंस डाटा सेंटर (आईएसएसडीसी) के द्वारा नजर रखी गई।

उपलब्धियों के धनी इस देश ने अब तकनीकी सफलताओं को अपना लक्ष्य बना लिया है। चंद्रयान की सफलता के बाद हुई एक संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने कहा कि चंद्रयान-द्वितीय 2012 तक प्रक्षेपित किया जाएगा। इसके लिए हमारे पास एक लैंडर होगा, जो चंद्रमा पर एक छोटा रोबोट छोड़ेगा। वह नमूने उठाएगा, आँकडे़ का विश्लेषण करेगा और आँकड़े को वापस भेजेगा। पहले ही चंद्रयान द्वितीय के लिए परियोजना बनाई जा चुकी है।

Show comments

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: यदि दयालुता हमारा स्वभाव है, तो हिंसा कहाँ से आती है?

वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक 'कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899' का गौरवमयी विमोचन

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

रानी दुर्गावती जयंती 2026: स्वाभिमान के लिए सीने में घोंप ली थी कटार, जानें गोंडवाना की महान महारानी के अमर बलिदान की कहानी

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार