कितने चमकदार हैं प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के चुनावी सितारे? पढ़ें 7 ज्योतिषीय तथ्य


-आचार्य राजेश कुमार

ज्योतिषियों का कहना है कि मोदी की जन्म तिथि और कुंडली को लेकर भ्रम की जो स्थिति बनी, उसकी वजह से परिणाम गणना में दिक्कतें आई हैं। विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी की जन्म कुंडली को लेकर कई तरह के भ्रम और भ्रांतियां हैं। कांग्रेस ने उनकी जन्म तिथि में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया था, उस लिहाज से प्रधानमंत्री के सितारों की पड़ताल में दिक्कतें आ रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि एमएन कॉलेज के छात्र रजिस्टर (जिसमें मोदी ने प्री-साइंस यानी 12वीं में दाखिला लिया था) में है। उनके चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी जन्म तिथि नहीं बताई है बल्कि अपनी उम्र लिखी है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उनकी औपचारिक जन्म तिथि 17 सितंबर है।
उन्होंने स्कूल रजिस्टर की प्रति दिखाई जिसमें प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्रकुमार दामोदरदास मोदी और उनकी उक्त जन्म तिथि लिखी है। मोदीजी के बाह्य एवं आंतरिक व्यक्तित्व, क्रिया-कलापों, उनके भाषण, पारिवारिक परिस्थितियों एवं गत लगभग 2 दशकों से प्रदेश एवं देश की सत्ता में रहकर किए गए कार्यों के आधार पर गहन अध्ययन एवं ज्योतिषीय विश्लेषण के पश्चात प्राप्त वास्तविक जन्म तिथि 17 सितंबर 1949, जन्म समय सुबह 10.55, जन्म स्थान वडनगर (गुजरात) के होने की संभावना ज्यादा है।
इस जन्म तिथि के आधार पर प्राप्त विवरण से पूर्व मोदीजी की बहुचर्चित जन्म तिथि सितंबर 17, 1950, जन्म समय 11 बजे से प्राप्त विवरण को समझना जरूरी है।
जानिए क्या कहती है नरेन्द्र मोदी की बहुचर्चित जन्म दिनांक सितंबर 17, 1950, जन्म समय 11 बजे की कुंडली?

सितंबर 17, 1950, जन्म समय 11 बजे, मेहसाणा (गुजरात) के अनुसार उनका जन्म लग्न वृश्चिक है और जन्म कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को विष्कुंभ योग में हुआ है। विष्कुंभ में जन्मा हुआ जातक कभी इतना उत्थान नहीं कर सकता।
1. वृश्चिक लग्न में मंगल तो है, परंतु शून्य अंश का है साथ में नीच का चन्द्रमा है जिसके चलते रूचक और विष्णु लक्ष्मी योग तो बनते हैं, परंतु बहुत ही कमजोर। कम से कम इतने शक्तिशाली तो नहीं जितने मोदी के दिखाई दे रहे हैं।

2. वृश्चिक लग्न में दशम भाव का मालिक सूर्य है, जो स्वयं एकादश भाव में केतु के साथ ग्रहण योग में बैठा है और दशम भाव में शत्रु के स्थान पर शनि विराजमान है, जो कभी भी इतना तगड़ा राजयोग नहीं दे सकता बल्कि हमेशा अवरोध उत्पन्न करेगा जबकि मोदी का पिछला जीवन देखा जाए तो मोदी निरंतर आगे बढ़े हैं और कभी भी उनके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं खड़ा कर पाया। साथ ही यह भी इतना प्रबल राजयोग नहीं बना सकता जितना मोदी का है।
3. गुरु भी केंद्र में है, परंतु शत्रु स्थान पर है और वक्री भी है अत: यहां गुरु से भी किसी प्रकार का राजयोग नहीं बन पा रहा है।

4. बुध एकादश भाव में कन्या राशि में है, परंतु वक्री है अत: बुधादित्य योग उतना प्रभावकारी नहीं दिखाई दे रहा है।

5. पंचम में राहु विद्या में बाधक है और उस पर सूर्य-बुध-केतु की दृष्टि से व्यक्ति बहुत नकारात्मक बुद्धि वाला या विध्वंसक विचार का हो जाएगा, अत: यहां यह योग भी समझ से परे है, क्योंकि मोदी इस तरह के व्यक्तित्व के स्वामी नहीं हैं।
6. सन् 1985 से लेकर 2005 तक मोदी की शुक्र की महादशा रही थी और जब अक्टूबर 2001 में मोदी मुख्यमंत्री बने तो शुक्र में शनि का अंतर था। वृश्चिक लग्न में शुक्र मारकेश है और बुध एवं शनि सहायक, इस गणना के अनुसार उस समय मुख्यमंत्री कैसे बन सकते थे मोदी?

इन सभी कारणों को देखते हुए हमने उनकी इस जन्म कुंडली को वास्तविक माना है जिसमें जन्म तिथि 17 सितंबर 1949, जन्म समय सुबह 11.55, जन्म स्थान वडनगर (गुजरात) है। इस 17 सितंबर 1949 की जन्म कुंडली के आधार पर जब हमने विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले नतीजे प्राप्त हुए, जो इस प्रकार हैं-
1. लग्न तुला है और तुला में ही शुक्र बैठा है- यह अपने आप में जबरदस्त राजयोगकारक है और व्यक्ति को कीचड़ में पैदा होने के बावजूद राजसिंहासन तक पहुंचाने की क्षमता रखता है और यह बात जो भी ज्योतिष जानते हैं, उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं कि लग्न में तुला के शुक्र का क्या मतलब होता है?

2. दशम भाव में नीच का मंगल- जिसके कारण पिता के सुख में कमी, परंतु उच्च दृष्टि मां के स्थान पर अत: मां की आयु लंबी होना तय है। भरपूर आशीर्वाद, साथ ही शत्रुओं को परास्त करने की अद्भुत क्षमता के योग स्पष्ट दिख रहे हैं।
3. पराक्रम भाव अर्थात तृतीय भाव में अपनी ही राशि पर बैठा वक्री गुरु है। यह भाई-बहनों के सुख को कमजोर करता है, परंतु अद्भुत पराक्रम देता है। मोदी के बारे में ये दोनों ही बातें सर्वविदित हैं।

4. राज्येश चन्द्रमा का भाग्य स्थान अर्थात नवम भाव में बैठना एक अद्भुत राजयोग है। साथ ही गुरु और चन्द्रमा का दृष्टियोग जबरदस्त पराक्रम, राजक्षमता, सृजनात्मक विचार इन सबसे व्यक्ति ओत-प्रोत बनता है और ये सभी गुण मोदी में विद्यमान हैं।
5. एकादश भाव में शनि- यहां बैठकर शनि लग्न, पंचम और अष्टम भाव को सीधे देख रहे हैं अत: देर से विद्या की प्राप्ति, लग्न पर उच्च दृष्टि के कारण निरोगी एवं आध्यात्मिक विचारधारा, दु:खी लोगों के प्रति सेवा का भाव आदि सभी गुण प्रदान कर रहा है, साथ ही जीवन में अत्यधिक यात्रा और यात्रा व सेवा के द्वारा लाभ को दर्शाता है और इन सभी बातों को मोदी के संदर्भ में बताने की आवश्यकता नहीं।

6. छठे भाव में राहु- कम से कम किसी ज्योतिष के विद्वान को इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं। शत्रुओं पर जबरदस्त प्रभाव और जिसने भी शत्रुता की, वह टिक नहीं सका और यही आचार्य राजेश कुमार ने पहले भी लिखा कि संजय जोशी, केशूभाई पटेल और शंकरसिंह वाघेला आज नैपथ्य में चले गए हैं और पूरी तरह से मोदी पर आश्रित हैं। नीतीश, मायावती, मुलायम, अरविंद केजरीवाल, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद जैसे न जाने कितने लोग मोदी का विरोध करने की वजह से मोदीजी से परास्त हुए।
7. द्वादश भाव में केतु, सूर्य और बुध- जो स्वयं कन्या यानी कि बुध की अपनी राशि में हैं, जो एकसाथ युति कर रहे हैं। ऐसा किसी भी व्यक्ति को जबरदस्त योजनाकार, भ्रमणशील, प्रखर वक्ता, धर्मरक्षक तथा परोपकारी बनाता है, साथ ही यह योग पुन: किसी भी शत्रु के लिए अत्यंत घातक है। सूर्य शून्य अंश का और पिता का कारक और ग्रहण योग में होने के कारण पिता के सुख में कमी और पैतृक संपत्ति तथा पैतृक स्थान के सुख में भारी कमी को दर्शाता है।
वर्तमान एवं आने वाला समय मोदीजी और बीजेपी के लिए कैसा रहेगा?

लग्नेश शुक्र में तृतीयेश एवं खष्टेश गुरु की अंतरदशा यह इशारा करती है कि इस बार भी बीजेपी यदि मोदी के नाम पर चुनाव प्रचार में उतरती है तो उसे फायदा होगा किंतु विवादों से भरा समय होगा। मोदी की इस कुंडली के हिसाब से इस बार फिर मोदी ही बीजेपी के नेता चुने जाएंगे। एक विशेष बात, मोदीजी को स्वयं तथा अपनी माताजी एवं बड़े भाई के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना पड़ेगा।
मोदीजी यदि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में सामंजस्य चाहते हैं तो हीरा एवं पन्ना तत्काल धारण करें।

क्या कहती है बीजेपी की कुंडली?

जानकारों के अनुसार बीजेपी का जन्म 6 अप्रैल 1980 में हुआ है। इसके तहत बीजेपी की कुंडली बनाई जाए तो मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की कुंडली बनेगी। बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2012 से सूर्य की महादशा आरंभ हुई है। सूर्य की महादशा में बीजेपी को लाभ होना शुरू हुआ, इसके बाद ही बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी बनाया गया। उस समय पीएम मोदी की कुंडली में अच्छा समय था जिसकी वजह से बीजेपी और पीएम मोदी की कुंडली दोनों के ग्रहयोग के चलने के साथ ही पहली बार केंद्र में बहुमत की सरकार बनी।
सूर्य की महादशा 6 साल के लिए होती है। तृतीयेश के सूर्य की दशा के चलते बीजेपी ने कई राज्यों में चुनाव जीता। इसी कार्यकाल में बीजेपी ने अपनी सरकार बनाई, परंतु जब बीजेपी की कुंडली में सूर्य की महादशा में शुक्र की अंतरदशा लगभग मार्च 17 से मार्च 18 तक चली, तब तक फल अच्छा नहीं हुआ। तमाम तरह के आरोप लगने लगे। इसके बाद लगभग अप्रैल 18 से नई महादशा चंद्रमा की प्रारंभ हुई, जो कि बीजेपी का धनभाव है। निश्चित रूप से धनेश की दशा उन्नति की ओर ले जाती है, परंतु जब तक धनेश चंद्रमा की महादशा में चंद्रमा की अंतरदशा अप्रैल 18 से लगभग जनवरी 19 तक चली। यह समय भी अत्यधिक विवादों में रहा जिसमें बीजेपी को 3 राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं तेलंगाना में मुंह की खानी पड़ी, क्योंकि महादशा अंतरदशा एक ही होने पर अच्छा परिणाम नहीं मिलता है। इसी कारण बीजेपी का खराब प्रदर्शन शुरू हो गया है और बीजेपी पर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं।
खास बात है कि धनेश चंद्रमा की महादशा में खष्टेश एवं आयेश मंगल की अंतरदशा जनवरी 2019 से प्रारंभ हुई है, जो सफलता की बात तो करती है किंतु चंद्रमा और मंगल दोनों के मूल में होने के कारण आने वाला समय पक्ष में तो होगा किंतु अच्छे परिणाम की उम्मीद कम होगी अर्थात पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में संघर्ष अधिक होगा। अंतत: अधिकतर राज्यों में विजय प्राप्त करने में बीजेपी सफल होगी।


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