योगा मसाज और स्नान के बहुत से चरण होते हैं। सप्ताह में एक बार योग अनुसार मसाज और स्नान करने से शरीर फिर से तरोताजा होकर युवा बना रहता है। यह व्यक्ति की थकान, चिंता, रोग आदि को दूर करने में सक्षम है। तनाव और प्रदूषण भरे माहौल से निकल कर व्यक्ति हल्का और तरोताजा होना चाहता है इसी के चलते योगा रिजॉर्टों में आजकल इसका प्रचलन बढ़ गया है, लेकिन आप चाहे तो इसे घर में भी कर सकते हैं।
*योगा मसाज : चेहरे पर हल्का-सा क्रीम या तेल लगाकर धीरे-धीरे उसकी मालिश करें। इसी तरह हाथों और पैरों की अँगुलियाँ, सिर, पैर, कंधे, कान, पिंडलियाँ, जंघाएँ, पीठ और पेट की मालिश करें। अच्छे से शरीर के सभी अँगों को हल्के-हल्के दबाएँ जिससे रुकी हुई ऊर्जा मुक्त होकर उन अँगों के स्नायु में पहुँचे तथा रक्त का पुन: संचार हो। हालाँकि योगा मासाज और भी व्यापक तरीके से होता है इसके अंतर्गत पूरे बदन का घर्षण, दंडन, थपकी, कंपन और संधि प्रसारण के तरीके से मसाज किया जाता है।
*योगा स्नान : सुगंध, स्पर्श, प्रकाश और तेल का औषधीय मेल सभी शारीरिक व मानसिक विकारों को दूर करता है। इसे आयुर्वेदिक या स्पा स्नान भी कहते हैं। इस स्नान के कई चरण होते हैं। इन चरणों में अभ्यंगम, शिरोधारा, नास्यम, स्वेदम और लेपन आदि अनेक तरीके अपनाए जाते हैं। इसके पूर्व आप चाहें तो पंचकर्म को भी अपना सकते हैं। पंचकर्म अर्थात पाँच तरह के कार्य से शरीर की शुद्धि करना। ये पाँच कार्य हैं- वमन, विरेचन, बस्ति-अनुवासन, बस्ति-आस्थापन और नस्य।
*इसके लाभ : इससे माँसपेशियाँ पुष्ट होती हैं। दृष्टि तेज होती है। चैन की नींद आती है। शरीर में शक्ति उत्पन्न होकर शरीर का रंग सोने के समान चमकता है। योगा मसाज या स्नान से ब्लड सर्कुलेशन सुचारु रूप से चलता है। इससे टेंशन और डिप्रेशन भी दूर होता है। बहुत से रोगों में योग चिकित्सक इसे करने की सलाह देते हैं।
*आसान है ये आसन : इसके अलावा आप चाहे तो निम्न बारह आसनों को नियमित कर सकते हैं। इनके करने से किसी भी प्रकार का रोग नहीं होगा। इससे आपका यौवन बरकरार रहेगा। यह बारह आसन निम्न हैं- पद्मासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तनासन, मयुरासन, भद्रासन, मुद्रासन, भुजंगासन, चंद्रासन और शीर्षासन।