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योग बढ़ाए आत्मविश्वास!

योग
- डॉ. बीके बांद्र
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आत्मविश्वास या इच्छाशक्ति व्यक्ति के मनोशारीरिक मापदंड पर निर्भर करती है स्वस्थ मस्तिष्क और स्वस्थ शरीर ही आत्मविश्वास या इच्छाशक्ति बनाए रख सकता है। नित्य योगाभ्यास के लिए भी इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। चेतन मन से किसी कार्य की योजना बार-बार दोहराने से वह अवचेतन में प्रतिबिंबित होने लगती है और अवचेतन मन अपार शक्ति के साथ कार्य करने लगता है तथा अपार सफलता प्राप्त होती है।

शरीर की शर्करा (ब्लड शुगर) की मात्रा स्थिर रखना इच्छाशक्ति व आत्मविश्वास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इच्छाशक्ति का उपयोग करते समय रक्तशर्करा कम होती है अथवा उसकी आवश्यकता बढ़ जाती है। दोपहर का भोजन टालकर कार्यालय में काम करने से शाम तक इच्छाशक्ति कम हो सकती है।

अतः एक बार भरपेट भोजन न लेकर थोड़ा-थोड़ा भोजन 2-3 बार करने से रक्तशर्करा का स्तर शरीर में सामान्य बना रहेगा। परिणामस्वरूप इच्छाशक्ति तथा कार्य करने का आत्मविश्वास बना रहेगा। दोपहर के भोजन में थोड़ा कार्बोज व थोड़ा प्रोटीन का भाग होना आवश्यक है। इससे कार्य के प्रति आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है। नियमित योगाभ्यास करने से चयापचय नियंत्रित होकर रक्तशर्करा की मात्रा नियंत्रित होती है।

अधिक भोजन करने से रक्त संचार पेट में अधिक व मस्तिष्क में कम हो जाता है। परिणामतः इच्छाशक्ति की कमी होने लगती है। वैज्ञानिक भाषा में लेपटिन हार्मोन की कमी मस्तिष्क में होने से भूख कम होकर आत्मविश्वास कम होने लगता है

आत्मविश्वास या इच्छाशक्ति बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक कैलोरी के रूप में सुझाव देते हैं। डॉ. नील बर्नार्ड (एमडी) ने 'दस का नियम' बताया है अर्थात्‌ व्यक्ति के वजन को 10 का गुणाकार करने के बाद जो संख्या बनती है उतनी कैलोरी दैनिक भोजन के रूप में लेने से आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ में 30 से 40 मिनट का योगाभ्यास, पैदल भ्रमण आदि करना चाहिए। इससे लेपटिन हार्मोन की मात्रा नियंत्रित रहती है, जिससे आत्मविश्वास स्थिर बना रहता है।

कम निद्रा या अनिद्रा व्यक्ति के आत्मविश्वास या इच्छाशक्ति पर निश्चित कुप्रभाव डालती है। 6 घंटे से कम नींद लेने वालों की इच्छाशक्ति या आत्मविश्वास या आत्मनियंत्रण कम होने का कारण घ्रेलीन हार्मोन का बढ़ना होता है। यह हार्मोन मस्तिष्क में धुँधलापन पैदा करते हुए मस्तिष्क में असंतुलन की स्थिति निर्मित करता है अर्थात दुविधा या अंतर्द्वंद्व की स्थिति बनती है और आत्मविश्वास कम हो जाता है। निर्णय लेने की क्षमता क्षीण हो जाती है।

अतः आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए 7 से 8 घंटे तक सोना आवश्यक है। ध्यान का अभ्यास बहुत जरूरी है। यह अभ्यास प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट के लिए अवश्य करना चाहिए। गीता के अनुसार 'युक्ति आहार विहार' के अनुरूप भोजन और निद्रा के साथ योगाभ्यास भी अति उपयुक्त है।

योगासन में ताड़ासन (आँखें बंद करके), संतुलित त्रिकोणासन, हनुमानासन, मेरूदंडासन, उत्कटासन, गरुडासन, बकासन, मयूरासन, उत्थितपद्मासन, पद्म मयूरासन, पद्म बकासन, धनुरासन, सर्वागासन और चक्रासन का अभ्यास करना चाहिए। प्राणायाम में तीन-चार आवर्तक भस्त्रिका कुम्भक करना चाहिए। अनुलोम-विलोम कुम्भक के साथ 1:2:4 के अनुपात में करना चाहिए। आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने में उपरोक्त योगाभ्यास योग्य प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। (नईदुनिया)
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