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दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

Abhay Chhajlani
  • श्रद्धा बच्छावत
दिन बदल जाते हैं— मौसम बदल जाते हैं और साल बदल जाते हैं। लेकिन कुछ स्‍मृतियां, कुछ सीख और कुछ रिश्‍तों के अर्थ और उनकी अहमियत कभी नहीं बदलती। ऐसे रिश्‍ते जो अपनी अगली पीढ़ी को तब भी सींचते रहते हैं, जब वे दुनिया में सशरीर नहीं होते हैं। तब भी अपनी उर्जा और अपना आशीर्वाद अपने बच्‍चों पर बनाए रखते हैं जब वे चले जाते हैं।

सुखद बात यह है कि उनकी पीढ़ी भी अपने उन पुरखों को कभी भुलाती नहीं, उन्‍हें शिद्दत से याद करती है, उनके प्रति अपना स्‍नेह लुटाती हैं और उन्‍हें समय-समय पर अपने लिए किसी रूहानी नैमत के तौर पर याद करती रहती है। ऐसा ही एक रिश्‍ता है दादा और पोती के बीच।

आज 4 अगस्‍त को नईदुनिया के शिखर पुरुष अभय छजलानी का जन्‍मदिवस है। इस मौके पर उनकी पौत्री श्रद्धा ने कुछ इसी स्‍नेह और अपनेपन से याद किया है। उन्‍होंने अपने दादा अभय जी की स्‍मृति में एक सुंदर कविता लिखी है। इस मौके पर पढ़िए ये कविता।

(श्रद्धा बच्छावत की कविता) 

कुछ लोग केवल जीवन जीते हैं
कुछ जीवन का अर्थ सिखा जाते हैं
कुछ नाम समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं
और कुछ पीढ़ियों की पहचान बन जाते हैं


आप उन्हीं में से एक थे, दादाजी

शब्द आपके हथियार नहीं
आपका चरित्र थे
स्याही से केवल समाचार नहीं लिखे
विश्वास की कहानी लिखी थी आपने

एक अख़बार का संपादन किया
पर सच तो यह है कि
पत्रकारिता की एक पूरी पीढ़ी गढ़ दी
आपका कार्यालय केवल दफ़्तर नहीं था
वह पत्रकारिता की पाठशाला था

पद से नहीं
अपने व्यवहार से बड़े बने
हर व्यक्ति को एक-सा सम्मान दिया
चाहे वह किसी भी पहचान का हो
यही आपका सबसे बड़ा परिचय था

आपकी वाणी में ऐसा ओज था
कि लोग सुनते भी थे और सीखते भी
आपके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण था
कि मिलने वाला हर व्यक्ति
अपने साथ कुछ अच्छा लेकर लौटता था

आज लोग हमारे परिवार का नाम लेते हैं
तो उसमें आपकी कमाई हुई प्रतिष्ठा की गूँज सुनाई देती है
यह विरासत धन से नहीं
सादगी और सद्भाव से बनी है

समय आपको हमसे दूर ले गया
पर आपके विचार आज भी
हमारे निर्णयों में जीवित हैं
आपकी सीख हमारी राह है
आपका आशीर्वाद हमारी शक्ति

कुछ दीपक बुझकर भी
अपनी रोशनी छोड़ जाते हैं

आप भी वैसे ही एक दीप थे, दादाजी—
जो आज भी हमारे जीवन को
प्रकाशित कर रहे हैं
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