जागरूकता का दूसरा नाम-सुषमा

बहरहाल अपने प्रॉडक्शन क्रू के साथ गलियों से लेकर मंदिरों तक में प्रस्तुतियाँ देने वाली सुषमा का यह कदम क्या सकारात्मक जागृति ला रहा है, ये उनके शब्दों में कुछ इस प्रकार है- 'जब महिलाएँ मेरे पास आकर कहती हैं कि मेरी प्रस्तुति उन्हें आत्मविश्वासी बना रही है तो लगता है जैसे मेरा प्रयास सफल हो गया। वे कहती हैं उन्होंने मुझमें सावित्रिबाई को देखा। वाकई सावित्रि ने मुझे सब कुछ दे दिया और आज मैं उनकी वजह से ही जानी जाती हूँ।'



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