अकेली युवती... आजमाती है बचाव के कैसे-कैसे उपाय...

जानिए, क्या-क्या करती है एक नारी अपनी 'सुरक्षा' के लिए.... 
 
सदियों से स्त्री ने सवाल नहीं किए, उससे जुड़े सवाल स्वत: ही सतह पर आ जाते हैं और जवाब होकर भी सवालों का सामना नहीं कर पाते। सवाल स्नेह का, सम्मान का और सबसे अहम सुरक्षा का...। कई बार स्त्री स्वयं नहीं जानती कि वह किससे डर रही है, उसे डराने वाला कौन है? उसे सुरक्षा किससे चाहिए? यह जो अदृश्य भय का भूत है, वह इन दिनों इस कदर विकराल हो रहा है कि सुरक्षा और स्वतंत्रता के तमाम दावों से हवा निकल गई है। 
नन्ही बच्चियां, किशोरियां, लड़कियां, युवतियां, महिलाएं, प्रौढ़ाएं, वृद्धाएं....वर्गों में बंटी हर नारी इन दिनों ना जाने किससे इतनी क्यों आतंकित है कि वह हर मोर्चे पर अकेली संघर्ष करते हुए भी स्वयं को लेकर कहीं कोई एक आड़, एक छांव, एक सुरक्षा, कोई एक संबल, कोई एक सहयोग और कोई एक सहारा अपने साथ लेकर चलती है.... तो क्या हम यह सोचें कि यह प्रगतिशील देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है... या इसे समझदारी, सतर्कता या समय की जरूरत मानें या इस बात को लेकर स्यापा मनाते रहे कि हम आज भी इतनी भयभीत क्यों हैं?  
 
आइए जानते हैं कि अपनी सुरक्षा के मद्देनजर गांव और छोटे शहरों की लड़कियां क्या कुछ आजमा रही हैं जबकि वे यह भी नहीं जानती कि क्या सचमुच इन उपायों में उसकी संपूर्ण सुरक्षा निहित है? 



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