डेट रेप: प्रेम में छलावा
कैसे बचें युवतियाँ कपटियों से
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होशंग घ्यारा '
डेट रेप' का वीभत्स साया भारतीय महानगरों एवं नगरों तक आ पहुँचा है। किसी मित्र, प्रेमी, परिचित के साथ बाहर जाने पर भयभीत कर, ब्लैकमेल कर अथवा नशीले पदार्थ द्वारा असहाय करके महिला के ऊपर की गई यौन हिंसा डेट रेप की श्रेणी में आती है। यूँ महिलाएँ सदियों से पुरुषों के वहशीपन की शिकार होती आई हैं लेकिन डेट रेप का फिनोमेनन नया है। भारतीय समाज, खास तौर पर शहरी समाज में अनेक स्तरों पर परिवर्तन आ रहे हैं। इस संक्रमणकाल ने डेट रेप के लिए उर्वर जमीन तैयार कर रखी है।रूपाली जब अपनी 'सहेली' के यहाँ रात भर 'पढ़ाई' करके सुबह घर लौटी, तो सामान्य से कोसों दूर लग रही थी। उसकी मानसिक स्थिति कुछ भ्रमित-सी प्रतीत हो रही थी। आम तौर पर बातूनी रहने वाली वह सहमी-सहमी लग रही थी। घर वालों ने अनुमान लगाया कि रात भर पढ़ने के चलते नींद की कमी व थकान के कारण शायद उसकी यह स्थिति है।लेकिन रूपाली की माँ को किसी अनहोनी की आशंका सता रही थी। उनके बार-बार पूछने पर भी रूपाली पहले तो यही कहती रही कि कुछ नहीं, बस पढ़ाई का टेंशन है लेकिन अंततः वह माँ से सच को छुपा नहीं सकी। उसने जो बताया, उस पर पहले तो माँ को विश्वास नहीं हुआ। फिर उन्हें ऐसा लगा मानो उनके चारों ओर सब कुछ भरभराकर ढह रहा हो और उनके पैरों तले से जमीन पिघलकर उन्हें किसी अथाह, अंधेरी खाई में धकेल रही हो। रूपाली रात को सहेली के पास गई तो थी मगर वे दोनों अकेली नहीं थीं और न ही उनका इरादा पढ़ाई का था। दरअसल उनकी पूरी मित्र मंडली, जिसमें लड़के-लड़कियाँ दोनों शामिल थे, एक मित्र के जन्मदिन की पार्टी मनाने के लिए शहर के बाहर एक अन्य मित्र के फार्महाउस पर गए थे। रूपाली को कोई खतरा महसूस नहीं हुआ था क्योंकि सब उसके कॉलेज के साथी, मित्र ही थे और वे लोग पहले भी होटलों, पिकनिक स्थलों आदि पर पार्टियाँ मना चुके थे।और फिर मंडली में हिमांशु भी तो था, जिसके साथ अपनी शेष जिंदगी बिताने के सपने रूपाली देख रही थी। अच्छे घर का सुशील युवक हिमांशु। फार्म हाउस पहुँचने पर रूपाली ने पाया कि पार्टी के लिए खाने के अलावा 'पीने' का भी इंतजाम किया गया था। उसने और एक-दो अन्य लड़कियों ने इस पर असहजता दर्शायी, तो शेष साथियों ने उन्हें 'ब्रॉड माइंडेड' होने की नसीहत दे डाली। साथ ही यह भी बताया कि उनके लिए सॉफ्ट ड्रिंक्स तथा ज्यूस की भी व्यवस्था है।शीघ्र ही पार्टी पूरे शबाब पर थी। हास-परिहास, म्यूजिक-डांस के साथ अपनी पसंद के अनुसार अल्कोहॉलिक या नॉन-अल्कोहॉलिक ड्रिंक्स तथा स्नैक्स का दौर चल रहा था कि अचानक रूपाली को सिर कुछ भारी-भारी-सा लगने लगा। हाथ-पैर कमजोर पड़ चले। उसने तो बस, ज्यूस पीया था..! हिमांशु ने उससे पूछा, 'तुम्हारी तबीयत तो ठीक है?' तो उसने कहा, 'नहीं।' इसके बाद क्या हुआ, रूपाली को ठीक-ठीक याद नहीं। |
| 'डेट रेप' का वीभत्स साया भारतीय महानगरों एवं नगरों तक आ पहुँचा है। किसी मित्र, प्रेमी, परिचित के साथ बाहर जाने पर भयभीत कर, ब्लैकमेल कर अथवा नशीले पदार्थ द्वारा असहाय करके महिला के ऊपर की गई यौन हिंसा डेट रेप की श्रेणी में आती है। |
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बस, कुछ धुंधली-सी तस्वीरें स्मृति पटल पर लुका-छिपी खेलती-सी हैं...हिमांशु का यह कहना कि ऊपर कमरे में जाकर कुछ देर आराम कर लो...चलो, मैं ही तुम्हें वहाँ तक छोड़ आता हूँ...एक अजनबी कमरा, एक अजनबी बिस्तर...एक अजनबी हिमांशु..! अंततः जब वह एक अजीब-सी नींद की आगोश से बाहर आई, तो पूरी दुनिया मानो उस बिस्तर और उसके कपड़ों की तरह अस्त-व्यस्त हो गई थी।
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| बेटियों को सख्त पहरों में कैद रखने की मानसिकता से बाहर आकर उन्हें उनके हिस्से का मुक्त आकाश देने की सद्बुद्धि तो इस समाज में आ रही है लेकिन बेटों के मन के किसी कोने में बैठी पुरुष सत्तात्मक सामंतवादी मानसिकता उनके साथ बुरा बर्ताव कर रही है। |
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डेट रेप' का वीभत्स साया भारतीय महानगरों एवं नगरों तक आ पहुँचा है। किसी मित्र, प्रेमी, परिचित के साथ बाहर जाने पर भयभीत कर, ब्लैकमेल कर अथवा नशीले पदार्थ द्वारा असहाय करके महिला के ऊपर की गई यौन हिंसा डेट रेप की श्रेणी में आती है। भारतीय समाज, खास तौर पर शहरी समाज में अनेक स्तरों पर परिवर्तन आ रहे हैं। समूची दुनिया के श्वेत-स्याह पक्ष से रूबरू होता यह समाज आधुनिकता व रूढ़िवाद, उदात्त विचारों के मुक्तिदायी अनुभव और पुरातन संकीर्णताओं की निर्बाध जकड़न के बीच एक संक्रमण काल से गुजर रहा है।बेटियों को सख्त पहरों में कैद रखने की मानसिकता से बाहर आकर उन्हें उनके हिस्से का मुक्त आकाश देने की सद्बुद्धि तो इस समाज में आ रही है लेकिन बेटों के मन के किसी कोने में जेनेटिक तौर पर बैठी पुरुष सत्तात्मक सामंतवादी मानसिकता के जालों को पूरी तरह साफ करने में यह अब तक तो नाकाम रहा है।वह मानसिकता, जो तमाम प्रगतिशीलता व आधुनिकता के बावजूद किसी स्तर पर स्त्री को महज भोग्या मानती है। जिसमें पौरुषपरिभाषित होता है बल, प्रभुत्व एवं एक शिकारी की विजयानुभूति द्वारा। इस संक्रमणकाल ने डेट रेप के लिए उर्वर जमीन तैयार कर रखी है।कौन होती हैं शिकार?भारत में डेट रेप की शिकार अधिकांश लड़कियाँ 14 से 23 वर्ष की होती हैं। हमारे यहाँ अब भी माता-पिता की सहमति से डेटिंग करने का चलन न के बराबर है। यूँ तो घरवालों की सहमति से किसी लड़के के साथ गई लड़की भी डेट रेप की शिकार हो सकती है लेकिन वे लड़कियाँ अधिक खतरे में होती हैं जो घर पर झूठ बोलकर मित्रों/प्रेमी के साथ कहीं गई हैं।मुसीबत में पड़ने पर वे मदद के लिए घर फोन नहीं कर पातीं। साथ ही यदि वे अपने वाहन से नहीं गई हैं तथा टैक्सी, बस आदि से लौटने के लिए पर्याप्त पैसे उनके पास नहीं हैं, तो वे अधिक जोखिम में होती हैं। स्वयं शराब पीने अथवा शराब पीने वाले या अन्य नशीले पदार्थ लेने वाले लड़कों के साथ जाने पर भी खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कौन होते हैं खलनायक?आम तौर पर देखा गया है कि डेट रेप में वे लड़के लिप्त होते हैं जिनमें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से हिंसक वृत्ति मौजूद होती है। वे किसी भी प्रकार लड़की को 'हासिल' कर अपना पुरुषत्व 'साबित' करना चाहते हैं। अक्सर जिस लड़के ने पार्टी स्थल, खानपान, गाड़ी आदि की व्यवस्था की है, वह मानकर चलता है कि उसे कुछ भी करने का अधिकार मिल गया है।पुरानी विकृत मान्यताएँ भी लड़कों के मन में यह धारणा बिठा देती हैं कि डेट रेप जायज है। ये मान्यताएँ कुछ इस प्रकार हैं: 'लड़की की ना का मतलब हाँ ही होता है, लड़कियाँ मन ही मन जोर-जबर्दस्ती पसंद करती हैं, जो लड़की पार्टी में आने को तैयार हुई वह कुछ भी करने के लिए तैयार होगी' आदि।कभी साथियों द्वारा अपनी मर्दानगी/हिम्मत/आधुनिकता साबित करने का दबाव तो कभी महज वर्जित फल चखने की लालसा उन्हें इस ओर धकेलती है। यह विचार भी उनका दुस्साहस बढ़ा देता है कि लड़की अपनी साथ घटी अनहोनी की जानकारी घरवालों को नहीं देगी, उस स्थिति में तो नहीं ही, जब वह घर पर बताए बगैर या झूठ बोलकर आई है।डेट रेप ड्रग्सविश्वास के आवरण में छुपे इस छल को और आसान बनाया है डेट रेप ड्रग्स ने। ये ऐसे नशीले पदार्थ हैं, जो बलात्कारियों के हथियार साबित हो रहे हैं। इनमें कुछ तो प्रतिबंधित हैं और कुछ चिकित्सकीय उपयोग के लिए प्रचलित हैं। जो भी हो, ये खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होने चाहिए लेकिन उपलब्ध हैं।इनमें कुछ तो इस कदर रंगहीन, गंधहीन एवं स्वादहीन होते हैं कि किसी पेय में चुपके-से मिला दिए जाने पर अपनी उपस्थिति का अहसास भी नहीं कराते। नापाक मंसूबों को पूरा करने में ये मदद करते हैं। ये ड्रग्स कई प्रकार होते हैं लेकिन इनका परिणाम यही होता है कि सेवन करने वाला असहाय हो जाता है। सिर भारी हो जाता है, मांसपेशियाँ जवाब देने लगती हैं, सुधबुध खोने लगती है। व्यक्ति पूरी तरह बेहोश भी हो सकता है।एक विशेष प्रकार का ड्रग व्यक्ति को एक तरह की सम्मोहित अवस्था में ला देता है।कुछ ड्रग्स मस्तिष्क से कई घंटों की याददाश्त साफ कर देते हैं और डेट रेप की शिकार को बहुत कोशिश करने पर भी याद नहीं आता कि उसके साथ क्या हुआ था और किसने किया था।ऐसे कई ड्रग्स चंद घंटों में ही शरीर से बाहर निकल जाते हैं। उसके बाद किसी जाँच में ये पकड़ में नहीं आते और इनके प्रयोग को साबित करना लगभग असंभव हो जाता है। ये सभी ड्रग्स सोचने-समझने की शक्ति छीन लेते हैं। इनके प्रभाव में व्यक्ति ऐसे काम कर बैठता है, जो वह सामान्यतः नहीं करता।अनेक ड्रग्स अधिक मात्रा में लेने पर घातक सिद्ध होते हैंऔर इनसे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। शराब के साथ मिलाए जाने पर भी ये जानलेवा साबित हो सकते हैं।युवतियाँ बरतें सावधानीकहीं भी जाने के लिए हामी भरने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको कहाँ जाना है तथा वहाँ और कौन-कौन होगा। यदि स्थान अथवा साथियों के नाम सुनकर आपको असहज लगे, तो मना कर दें। * आपके माता-पिता चाहे कितने ही रूढ़िवादी क्यों न हों, उन्हें सच बात बताकर ही बाहर जाएँ। यदि आपको अपने साथियों पर पूरा भरोसा है लेकिन आपके माता-पिता को आपके जाने पर आपत्ति है, तो उन्हें अपने तर्क समझाने का प्रयास करें। घर पर झूठ बोलकर कहीं जानाकभी भी भारी मुसीबत का सबब बन सकता है।
* किसी पार्टी में अकेले या केवल एक लड़के के साथ जाने के बजाए समूह में जाएँ। समूह में कम से कम एक-दो लोग ऐसे हों, जिन पर आपको पूरा भरोसा हो। बेहतर यह होगा कि तीन-चार लड़कियाँ आपस में एक 'निगरानी प्रणाली' बना लें। ये पार्टी की सारी मौज-मस्ती के बीच एक-दूसरे पर निगाह रखें और यदि शक हो कि किसी पर नशे का असर हो रहा है, तो ये उसे संभाल लें। * आधुनिकता के नाम पर कोई कितना ही कहे, शराब का सेवन न करें। सॉफ्ट ड्रिंक्स या ज्यूस लें, तो यह सुनिश्चित करें कि वह आपके सामने ही बॉटल खोलकर परोसा जाए। अपना ग्लास अपने हाथ में ही रखें, इधर-उधर छोड़कर एक-दो मिनट के लिए भी कहीं नहीं जाएँ।यदि छोड़ा है, तो पुनः उसी ग्लास में पीने के बजाए नए ग्लास में नए सिरे से ड्रिंक लें। यदि किसी ड्रिंक में जरा-सी भी संदेहास्पद गंध या स्वाद महसूस हो, तो उसे तुरंत छोड़ दें। * बेहतर तो यही होगा कि आप अपने तमाम मित्रों, परिचितों को स्पष्ट कर दें कि आप ऐसी पार्टियों में नहीं जाएँगीं जहाँ शराब परोसी जाने वाली हो, ड्रग्स वाली पार्टियों में तो कतई नहीं। यदि पार्टी में पहुँचने के बाद आपको वहाँ का माहौल ठीक न लगे, तो लौट आने में हिचकिचाएँ नहीं। * वाहन के लिए किसी पर निर्भर न रहें तो ही अच्छा। अपने पास इतने पैसे अवश्य रखें कि जरूरी होने पर आप अकेली भी घर लौट सकें। मोबाइल फोन साथ हो और उसमें सभी जरूरी नंबर अवश्य हों। * जहाँ तक संभव हो, ऐसी ही पार्टियों में जाएँ, जो होटल, पित्जा पार्लर आदि जैसे सार्वजनिक स्थलों पर हों। अभिभावकों की अनुपस्थिति में किसी के घर पर होने वाली पार्टियाँ या फिर निर्जन स्थलों पर स्थित फार्म हाउस आदि में होने वाली पार्टियाँ स्वतः ही आपको खतरे में डाल देती हैं। * अपने मित्रों का चुनाव बहुत सोच-समझकर करें। आधुनिकता, स्वतंत्रता, मित्रता व प्रेम के सही अर्थ को समझें।अभिभावक दिखाएँ समझदारी* अपने बच्चों के साथ मित्रवत तथा ईमानदारी का संबंध रखें। आपके रिश्ते ऐसे हों कि बच्चों को कभी भी आपसे झूठ बोलने की जरूरत ही महसूस न हो। * पुराने विचारों तथा आधुनिकता के बीच जब तक आप संतुलन नहीं बनाएँगे, तब तक आपके बच्चे कैसे बनाएँगे? अपने आचरण द्वारा बच्चों को दिखाएँ कि नए जमाने के ट्रेंड्स को अपनाते हुए भी सही और गलत की मूलभूत अवधारणाएँ अपनी जगह कायम रहती हैं। * बेटा हो या बेटी, उसकी मित्र-मंडली से जान-पहचान बढ़ाएँ। हो सके तो इन मित्रों के पते व टेलीफोन नंबर भी अपने पास रखें। इन लोगों के साथ बेटी के बाहर जाने पर अनावश्यक रोकटोक न लगाएँ। हाँ, यह जरूर जान लें कि वह कहाँ जा रही है तथा उसके लौटने कीतर्कसंगत समय-सीमा भी स्पष्ट कर दें। * बेटी को अपनी रक्षा करने का हुनर अवश्य सिखाएँ। * उसे यह भी बताएँ कि भले ही वह अपने मंगेतर के साथ ही क्यों न गई हो, उसे 'ना' कहने का पूरा अधिकार है। * उसे विश्वास दिलाएँ कि यदि कोई अनहोनी हो जाए, तो आप उसकी सहायता के लिए हरदम मौजूद हैं। वह कभी भी, कहीं से भी आपको एक फोन करे, तो आप उसके पास पहुँच जाएँगे। * यदि हादसा हो जाए, तो बेटी को ही इसके लिए दोषी ठहराने की गलती कतई न करें। धैर्य से पूरी बात सुनें और सारी चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रक्रिया पूरी करें। लोक-लाज के नाम पर चुप बैठ जाने का मतलब यही होगा कि आप एक ऐसे भेड़िए को खुला घूमने में मदद कर रहे हैं, जो कई और बेटियों का जीवन तबाह कर सकता है।लड़के भी समझें* धोखा, कपट, बल-प्रयोग पिछड़ेपन की निशानी है, आधुनिकता या सफलता की नहीं। * खुलेपन का मतलब वैचारिक दुराव-छुपाव से मुक्ति है, न कि पशुवत आवेगों को खुली छूट देना। * स्वतंत्रता हो या ताकत, यह अपने साथ जिम्मेदारी भी लाती है। इस जिम्मेदारी को समझें। * स्वस्थ मानसिकता से लड़कियों के साथ की गई मित्रता के महत्व को समझें। उन्होंने आपको मित्र माना है, तो उनके विश्वास पर खरे उतरें। इस विश्वास को तोड़ने से आपकी मर्दानगी घटेगी ही, बढ़ेगी नहीं। वे भी आपकी तरह स्वतंत्र, गरिमापूर्ण जीवन जीने की अधिकारी हैं। उन्हें भावी शिकार के रूप में देखकर आदिम-युगीन मनोग्रंथी का शिकार न बनें। * दोस्ती या प्रेम के नाम पर की गई जबर्दस्ती भी जबर्दस्ती ही होती है और गलत भी। सच्चा प्रेम और सच्ची मित्रता मन में सम्मान का भाव जगाती है, अपनी बात थोपने या अपनी मर्जी मनवाने की भावना नहीं। * आप अपने भविष्य निर्माण की दहलीज पर खड़े हैं। क्या इस सफर की शुरुआत आप एक अपराधी के रूप में करना चाहेंगे?