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Written By ND

अपने दम पर कुछ कर दिखाया...

किरण मजुमदार शॉ

वामा
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सफलता स्त्रीलिंग शब्द है और अगर इस सफलता प्राप्ति में स्वयं स्त्रियाँ प्रयत्न करें तब शायद उन्हें जल्द सफलता मिलती है। देश में दैवीय स्वरूपा स्त्रियों को समाज में जाकर अब अपने दम पर कुछ कर दिखाने का मौका मिलने लगा है। इस मौके का वे न केवल फायदा उठा रही हैं, बल्कि समाज की भलाई का काम भी कर रही हैं।

बायोफार्मा के क्षेत्र में किरण मजुमदार शॉ का नाम न केवल आदर से लिया जाता है, बल्कि भी यह भी कहा जाता है कि आगे बढ़ना हो तब किरण की तरह बढ़ो।

बेंगलुरू में मार्च 1953 में जन्मी किरण ने 1973 में बेंगलुरू यूनिवर्सिटी से प्राणीशास्त्र में बीएससी और उसके बाद मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की। 1974 में कार्लटन एंड यूनाइटेड बेवरेजेज में प्रशिक्षु ब्रिवर (किण्वन) के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की।

इसके बाद 1978 में किरण ने आयरलैंड में बायोकॉन बॉयोकेमिकल्स लि. में प्रशिक्षु मैनेजर के रूप में नौकरी शुरू की, मगर वे नौकरी करने के लिए नहीं बनी थीं। यह बात साबित करने के लिए उन्होंने ज्यादा वक्त नहीं लिया। 1978 में ही किरण ने बायोकॉन इंडिया की स्थापना की। इस कंपनी की स्थापना उन्होंने आयरलैंड की बायोकॉन बायोकेमिकल्स लि. के साथ मिलकर की और तब उनके पास पूँजी के नाम पर सिर्फ 10 हजार रुपए की राशि थी।

बायोकॉन की स्थापना तो हो गई, मगर कंपनी को चलाने के लिए पैसे जुटाने में किरण को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक तो भारत में बायोटेक्नॉलॉजी बिलकुल नया क्षेत्र था। दूसरे, भारत में महिला उद्यमी की कल्पना भी मुश्किल थी। महिला को उद्यमी के रूप में देखकर बैंक लोन देने में भी हिचकिचाते थे। इसके बावजूद बायोकॉन ने काम करना शुरू किया। सबसे पहले जो काम कंपनी ने शुरू किया, वह था पपीते के रस से एक एंजाइम बनाना।

इसके बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब कंपनी पूरी तरह बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी बन चुकी है और इस क्षेत्र में शोध में भी अग्रणी है। कंपनी मधुमेह, कैंसर तथा अन्य घातक बीमारियों से संबंधित शोध में भी जुटी है। सफलता से उत्साहित किरण ने वर्ष 2004 में पूँजी बाजार में प्रवेश किया और कंपनी का पब्लिक इश्यू जारी किया।

किरण की सफलता की कहानी तब तक देश में चर्चा का विषय बन चुकी थी और इसी का नतीजा था कि यह पब्लिक इश्यू 30 गुना ओवर सबस्क्राइब हुआ। आज कंपनी का 40 प्रतिशत मालिकाना हक किरण के पास है और 2100 करोड़ रुपए के साथ आज वह भारत की सबसे धनी महिला उद्यमी हैं।

अमेरिका की एक पत्रिका ने वर्ष 2007 में बायोकॉन को दुनिया की बायोटेक्नॉलॉजी कंपनियों में 20वें नंबर पर रखा। उद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए किरण को राष्ट्रपति द्वारा 1989 में पद्मश्री और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।
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