1. शौक़ हर रंग रक़ीब-ए-सर-ओ-सामाँ निकला क़ैस तस्वीर के परदे में भी उअरयाँ निकलाज़ख्म ने दाद न दी तंगि-ए-दिल की यारब तीर भी सीना-ए-बिस्मिल से पुरअफ़शाँ निकलाAziz AnsariWD बू-ए-गुल, नाला-ए-दिल, दूद-ए-चिराग-ए-मेहफ़िल जो तेरी बज़्म से निकला सो परेशाँ निकला दिल में फिर गिरये ने इक शोर उठाया ग़ालिबआह जो क़तरा...