होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्याप्त संकट, विश्वभर में करोड़ों लोगों के निर्धनता के गर्त में धंसने, वैश्विक भूख संकट की चपेट में आने और दुनिया को मंदी की ओर धकेलने की वजह बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को यह चेतावनी जारी करते हुए इस संकरे जलमार्ग को जल्द से जल्द खोले जाने की पुकार लगाई है।
28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई बमबारी किए जाने और फिर ईरान के जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमलों से मध्य पूर्व क्षेत्र में भीषण संकट उपजा था। इस दौरान, फ़ारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाज़ों पर कई हमले हुए और समुद्री परिहवन थम गया। इस जलमार्ग से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का क़रीब 25 प्रतिशत, गैस व उर्वरक समेत अन्य सामान का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
पिछले कुछ सप्ताह से युद्धविराम लागू है, लेकिन होर्मुज़ जलमार्ग पर जहाज़ों की आवाजाही अब भी लगभग थमी हुई है और वहां अब भी असुरक्षा व्याप्त है। इससे विश्व के अनेक देशों में ईंधन, उर्वरक समेत अन्य सामान की क़िल्लत महसूस की जा रही है और स्थिति नाज़ुक होती जा रही है।
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में जहाज़ों की स्वतंत्र आवाजाही पर लगी रोक की भर्त्सना करते हुए कहा कि इससे तेल, गैस, फ़र्टिलाइज़र और अन्य महत्वपूर्ण सामान की आपूर्ति में अवरोध पैदा हो रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा है।
3 परिदृश्य
यूएन प्रमुख ने तीन सम्भावित परिदृश्यों को साझा करते हुए कहा कि यदि जहाज़ों और समुद्री व्यापार पर पाबन्दियां तुरन्त खोल भी दी जाती हैं, तो भी सप्लाई चेन को पूरी तरह से बहाल होने में कई महीने लग जाएंगे। वैश्विक आर्थिक प्रगति की दर 3.4 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत पर आ सकती है, जबकि मुद्रास्फीति बढ़कर 4.4 फ़ीसदी तक पहुंच सकती है। व्यापार में भी तेज़ गिरावट आएगी।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया, जो अभी वैश्विक महामारी के झटकों से उबर ही रही है और यूक्रेन में युद्ध से उपजे आर्थिक दबावों को सहन कर रही है, उसके लिए यह एक सर्वोत्तम परिदृश्य है।
भयावह नतीजे
यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि यदि ईरान के हमले व धमकियां और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरानी बन्दरगाहों की नाकेबन्दी इस वर्ष के मध्य तक जारी रही, तो इसके गहरे नतीजे होंगे।
3.2 करोड़ लोग निर्धनता में धकेल दिए जाएंगे, उर्वरक कम होंगे और फ़सलों की पैदावार में गिरावट आएगी। 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग अत्यधिक भूख का सामना करेंगे और विकास मोर्चे पर कड़ी मेहनत से दर्ज की गई प्रगति रातोंरात उलट जाएगी।
वहीं सबसे ख़राब परिदृश्य यदि सही साबित हुआ तो फिर इस वर्ष के अन्त तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गम्भीर व्यवधान बना रहेगा। वैश्विक मन्दी पैदा होगी, जिसका लोगों, अर्थव्यवस्था और राजनैतिक व सामाजिक स्थिरता पर गहरा असर होगा।
जलमार्ग को खोलिए
यूएन महासचिव ने कहा कि दुष्परिणाम एक-एक करके नहीं जुड़ेंगे, बल्कि बहुत तेड़ी से बढ़ते जाएंगे। जितने लम्बे समय तक इस अति महत्वपूर्ण धमनी को रोक करके रखा जाता है, उससे होने वाली क्षति को उलट पाना उतना ही कठिन हो जाएगा।
इसके मद्देनज़र, उन्होंने सभी पक्षों के लिए अपने सन्देश में स्पष्ट किया है कि नौवहन (navigation) अधिकारों और स्वतंत्रताओं को तत्काल बहाल किया जाना होगा। जलडमरूमध्य को खोलिए। सभी जहाज़ों को गुज़रने दीजिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से सांस लेने दीजिए।
सप्लाई चेन का संकट
करीना तामांग अपनी बहन मनिता को गोद में लिए रसोई गैस सिलेंडर पर बैठी हैं, जबकि उनकी मां सीता पास ही एक अन्य सिलेंडर पर बैठी हैं, जो बालाजू, काठमांडू के पास गैस सिलेंडर के लिए कतार में हैं। गुरुवार को ब्रैंट कच्चे तेल के दाम 118 डॉलर तक पहुंच गए और अनेक देश तेल, गैस और अन्य सामान की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए समाधान की तलाश में जुटे हैं।
योरोप के लिए यूएन आर्थिक आयोग में सतत ऊर्जा मामलों के निदेशक डारियो लिगुटी ने बताया कि दक्षिणपूर्व एशिया और दक्षिण एशिया में स्थित देश, एक पीढ़ी में अब तक के सबसे गम्भीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस ऊर्जा संकट में अभी तस्वीर स्पष्ट ही हो रही है। योरोपीय देशों में मोटरचालक अपने ईंधन टैंक को भराने के बाद किसी भी स्थिति के लिए तैयार हो रहे हैं।
विश्वभर में देशों की अर्थव्यवस्थाएं, जीवाश्म ईंधन, क्षेत्रीय व भूराजनैतिक झटकों के प्रति संवेदनशील हैं। इसे ध्यान में रखते हुए योरोपीय आर्थिक आयोग ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और उनका बुद्धिमत्तापूर्ण इस्तेमाल पर चर्चा के लिए जिनीवा में बैठक का आयोजन किया है।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक गैस (मीथेन) का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसकी ज्वाला को आमतौर पर तेल कुंओं, जीवाश्म ईंधन प्रसंस्करण संयंत्रों या रिफ़ाइनरी में बचाव उपाय के तौर पर जला दिया जाता है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर बल
विश्वभर में शोधन संयंत्रों में जलने वाली इस गैस को संग्रहित किया जा सकता है और फिर आवश्यकता होने पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है। यूएन आयोग का कहना है कि इस उपाय से ऊर्जा के प्राथमिक स्रोतों पर हमारी निर्भरता कम होगी।
यूएन एजेंसी पहले से ही मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों की अगुवाई कर रही है, जो कि 20 वर्षों की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड से 80 गुना अधिक घातक है और वैश्विक तापमान में वृद्धि की वजह भी। दुनियाभर से देशों ने वर्ष 2015 में, सतत विकास लक्ष्यों पर सहमति जताई थी, जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिशों को समर्थन दे रहा है।
UNECE अधिकारी ने कहा कि मौजूदा संकट एक स्पष्ट संदेश है कि परिवहन व्यवस्था या तापन प्रणाली (heating) के विद्युतीकरण के ज़रिए ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की ओर बढ़ा जाना होगा। हमें नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती में तेज़ी लाने की ज़रूरत है, चूंकि ये विकेन्द्रीकृत ऊर्जा स्रोत हैं और कहीं अधिक स्वच्छ हैं। केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से भी।