अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी कि यदि दो सप्ताह का नाजुक युद्धविराम मंगलवार शाम तक किसी ठोस समझौते के बिना खत्म हो गया, तो फिर बड़े पैमाने पर बमबारी शुरू हो सकती है।
पीबीएस न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने साफ कहा कि अगर युद्धविराम खत्म होता है तो हालात बिगड़ सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होगा, तो उन्होंने अनिश्चितता जताते हुए कहा कि मुझे नहीं पता… उन्हें वहां होना चाहिए। हमने भी वहां रहने पर सहमति जताई है। अगर वे नहीं आते, तो भी ठीक है, हम देखेंगे।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत के लिए तैयार हो रहा है। 22 अप्रैल की समय- सीमा के करीब पहुंचते इस युद्धविराम ने फिलहाल सीधे टकराव को रोका हुआ है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका की मुख्य मांग स्पष्ट है- 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, यह बहुत सरल है।' उन्होंने अपनी टीम पर भरोसा जताते हुए उसे 'ए-टीम' बताया और अपने दामाद जेरेड कुशनर का बचाव करते हुए कहा कि वे एक सक्षम वार्ताकार हैं और उनका ध्यान केवल ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकने पर है।
क्या जेडी वेंस पाकिस्तान जाएंगे?
इस बीच, कूटनीतिक स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी हुई है। ट्रंप ने पहले कहा था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान नहीं जाएंगे, लेकिन बाद में पुष्टि की कि वही प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने बताया कि वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं।
हालांकि, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सोमवार तक जेडी वेंस के रवाना होने की पुष्टि नहीं हुई थी, जिससे प्रशासन के बयानों में विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गई है।
ईरान ने दिखाई अनिच्छा
ईरानी सरकारी मीडिया ने फिलहाल अगली वार्ता में शामिल होने को लेकर उत्साह नहीं दिखाया है। सरकारी प्रसारक IRIB ने कहा कि “फिलहाल ईरान-अमेरिका वार्ता के अगले दौर में शामिल होने की कोई योजना नहीं है।” वहीं IRNA ने इसके पीछे अमेरिका की “अत्यधिक मांगें, अवास्तविक अपेक्षाएं और बार-बार बदलते रुख” को वजह बताया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्थक बातचीत के लिए वादों का सम्मान जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ईरान के लोगों में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास है… ईरानी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।”
बातचीत पर संकट, फिर भी उम्मीद बरकरार
इन सबके बावजूद ट्रंप ने बातचीत प्रक्रिया के विफल होने की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हम बातचीत करने वाले हैं… मुझे नहीं लगता कि कोई खेल खेल रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह खुद भी सीधे बातचीत के लिए तैयार हैं।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में हुई पहली सीधी वार्ता 21 घंटे से ज्यादा चली थी, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने इसे निराशाजनक बताया था, जबकि ईरान ने इसके लिए अमेरिका की शर्तों को जिम्मेदार ठहराया था।
फिलहाल, यह अस्थायी युद्धविराम आम लोगों के लिए थोड़ी राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन बातचीत में अनिश्चितता और तनाव के चलते हालात फिर से बिगड़ने का खतरा बना हुआ है। पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन समाधान अभी दूर नजर आ रहा है। Edited by : Sudhir Sharma