टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल तक पहुंच गए हैं भारत के 2 जांबाज सैनिक, सपना है भारत के लिए जीतें गोल्ड मेडल

Last Updated: सोमवार, 26 जुलाई 2021 (16:03 IST)
पहले दिन को छोड़ दिया जाए तो टोक्यो ओलंपिक में भारत के दिन अच्छे नहीं जा रहे। बैडमिंटन हो या टेबल टेनिस, शूटिंग हो या मुक्केबाजी भारतीय खिलाड़ी हर वर्ग से बाहर होते जा रहे हैं। ऐसे में मेडल की अगली उम्मीद आकर टिकती है सेना की जोड़ी पर जो में सेमीफाइनल तक पहुंच गए हैं।

भारत के और ने टोक्यो ओलंपिक में पुरूषों की नौकायन लाइटवेट डबलस्कल्स स्पर्धा के रेपेशाज दौर में तीसरे स्थान पर रहकर सेमीफाइनल में जगह बना ली थी। भारतीय जोड़ी ने 6:51.36 का समय निकाला। अर्जुन बोअर की और अरविंद स्ट्रोकर की भूमिका में थे। शुरूआती 1000 मीटर तक चौथे स्थान पर चल रही इस जोड़ी ने बाद में रफ्तार पकड़कर तीसरा स्थान हासिल किया।
जहां अर्जुन राजस्थान के नायबास गांव से हैं, वहीं अरविंद उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव खबड़ा से हैं, लेकिन दोनों बड़े होकर अपने माता-पिता को अपने मामूली खेतों की ओर बढ़ने में मदद करने लगे। ग्रामीण भारत के बहुत से युवाओं की तरह दोनों सुरक्षित नौकरी के लिए सेना में शामिल हो गए। उन दोनों को नौकरी के दौरान ही रोइंग में लाया गया था।
4 साल पहले जुड़े थे सेना से


2017 में अर्जुन और अरविंद ने सेना में शामिल होने का फैसला किया। दोनों का वजन लगभग 72.5 किलोग्राम था, जो कि एक अधिकतम रोवर है जो हल्के डबल स्कल्स श्रेणी में आ सकते थे, लेकिन टीम का औसत 70 किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकता। इस कारण दोनों को ही अपना वजन कम करना पड़ा।

एशियाई क्वालीफाइंग इवेंट में उज्बेकिस्तान जैसी मजबूत टीमों से दूसरे स्थान पर और आगे रहते वाले यह जोड़ी बिना किसी खेल के माहौल में फली-फूली है। दोनों के ही परिवार उनकी उपलब्धि से खुश हैं लेकिन इन दोनों का सपना है रोइंग में भारत के लिए गोल्ड मेडल लाने का जो करीब तो दिख ही रहा है। बस आगे मेहनत के साथ इनकी किस्मत भी साथ थे।

नौकायन लाइटवेट डबलस्कल्स वर्ग में दो खिलाड़ी एक नाव में होते हैं और दो दो चप्पू का इस्तेमाल करते हैं। हर पुरूष प्रतिभागी का अधिकतम वजन 72.5 किलो और औसत वजन 70 किलो होना चाहिये। महिला वर्ग में अधिकतम वजन 59 किलो और औसत 57 किलो होता है।



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