Aaj ka sher neeraj goswami | मैं लाकर गुल बिछाता हूँ
फसादों से न सुलझे हैं, न सुलझेगें कभी मसले,
हटा तू राह के कांटे, मैं लाकर गुल बिछाता हूँ - नीरज गोस्वामी
हटा तू राह के कांटे, मैं लाकर गुल बिछाता हूँ - नीरज गोस्वामी

