तुम्हारे पाँव के काँटे
तुम्हारे पाँव के काँटे निकाल दूँ आओ,
मगर ये राह में किस के लिए बिछाए थे।---अख़्तर नज़मी
मगर ये राह में किस के लिए बिछाए थे।---अख़्तर नज़मी
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