सामूहिक जीवन बीमा बनाम शादी
कुछ रिश्तों की बुनियाद होता है झूठ...। राहुल महाजन ने अपने से तेरह साल छोटी डिंपी से शादी कर तो ली, मगर कुदरत दोनों से इन तेरह बरसों का हिसाब जरूर माँगेगी। अभी तो दोनों ने एक-दूसरे से और अपने आप से झूठ बोल लिया है, मगर ये झूठ बहुत टिकाऊ नहीं रहने वाला। बहुत जल्दी ही देवता का झगड़ा पुजारी से हो जाएगा। दोनों ही पाएँगे कि उन्होंने एक दूसरे को तो ठगा ही है, अपने आप को भी ठगा है। बंगाली बाला डिंपी के लिए राहुल महाजन दूल्हे और जीवनसाथी से बढ़कर एक ट्रॉफी हैं जिसे उसने जीता है। कई बार होता यह है कि पहला इनाम कुछ फालतू-सी चीज होती है, मगर फिर भी उसके लिए स्पर्धा की जाती है क्योंकि फालतू सी चीज जीतने से ज्यादा मजा दूसरों को हराने में आता है। डिंपी ने ये मजा खूब लिया है। डिंपी के लिए राहुल महाजन ट्रॉफी तो हैं ही, विदेश यात्रा का पैकेज हैं, गहनों के भुगतान के लिए डेबिट कार्ड हैं, एक बढ़िया बंगला हैं, बैंक बैलेंस हैं, गाड़ी हैं, शोहरत हैं, दौलत हैं, जीवन की पक्की सुरक्षा हैं। राहुल महाजन के लिए डिंपी एक मनपंसद गुड़िया हैं। शो रूम में तेरह गुड़ियाएँ थीं। राहुल महाजन ने खूब वक्त लेकर ये गुड़िया पसंद की है। अपनी उम्र का उन्होंने खयाल नहीं किया। डिंपी की चढ़ती जवानी का भी उन्होंने ध्यान नहीं रखा। डिंपी के माता-पिता को भी ऐसा ही दामाद चाहिए था, जो उनकी बेटी को तो देखे उसके उन मित्रों को नहीं देखे, जिनके फोन डिंपी को राहुल महाजन से जुड़ जाने के बाद भी आते थे। गाँठ का पूरा ऐसा दामाद उन्हें चिराग तो क्या हेलोजन लेकर ढूँढने से भी नहीं मिलता। विवाह एक अर्ध धार्मिक, अर्ध सामाजिक संस्कार है। आयतों, मंत्रों और विधियों तक ये धार्मिक है फिर उसके बाद सामाजिक। जहाँ से ये संस्कार सामाजिक होता है, इसके साथ बहुत सी बुराइयाँ जुड़ने लगती हैं। लालच, सौदेबाजी, वासना, स्वार्थ...। एक विवाह में ये सब जितना हो सकता है, उतना (बल्कि उससे कहीं ज्यादा) राहुल महाजन और डिंपी की शादी में मौजूद है। राहुल महाजन की करोड़ों-अरबों की जायदाद पर (जो उनके पिता ने बहुत मेहनत और ईमानदारी से एकत्र की होगी) हर लड़की के माता-पिता की नजर थी। सबको पता है कि तलाक भी हो गया तो इतना मिलेगा कि लड़की अपने सारे रिश्तेदारों सहित ऐश से जिंदगी गुजार सकेगी। अगर कोई कहता है कि लड़कियाँ नहीं बिकतीं तो गलत कहता है। राहुल महाजन के लिए हाट लगा था। लड़कियाँ खुशी से आई थीं और इसमें उनके माता-पिता की सहमति थी। हमारे समाज में लड़कियों की साइकी ऐसी ही है। शादी का मतलब उनके लिए जीवन बीमा है। प्रसिद्ध क्रांतिकारी विचारक एंगेल्स ने अपने सपनों की दुनिया के बारे में बताते हुए लिखा था कि आदर्श समाज में किसी महिला को किसी पुरुष के आगे इसलिए समर्पण नहीं करना पड़ेगा कि वो पुरुष उसे आर्थिक सुरक्षा देगा, बल्कि आदर्श समाज में रिश्ते की बुनियाद परस्पर प्रेम, आदर और बराबरी की भावना होगी। दो लोग प्रेम की खातिर साथ में रहेंगे, किसी और वजह से नहीं।