Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया की तारीख को लेकर यह भ्रम अक्सर तब होता है जब कोई तिथि दो दिनों के बीच विभाजित हो जाती है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया की स्थिति को समझने के लिए हमें वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के प्रारंभ और अंत समय को देखना होगा। यहां इस भ्रम का मुख्य कारण और सही तारीख दी गई है।
1. तिथि का गणित (2026 के संदर्भ में)
अक्षय तृतीया के लिए मुख्य नियम यह है कि यह तिथि 'अपराह्न काल' (दोपहर के समय) में मौजूद होनी चाहिए, क्योंकि इसी समय दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। दूसरी यह कि यति विवाह किया जा रहा है तो तिथि प्रदोषकाल (गोधुली वेला) में होना चाहिए।
19 अप्रैल, 2026: तृतीया तिथि इस दिन सुबह 10:49 बजे से शुरू हो रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स अक्सर उस समय को दिखाते हैं जब तिथि तकनीकी रूप से 'प्रवेश' करती है। यदि विवाह करना है तो 19 अप्रैल की तिथि लें।
20 अप्रैल, 2026: इस दिन सुबह 07:27 बजे तिथि समाप्त होगी। इस दिन तृतीया तिथि 'उदयातिथि' के रूप में मौजूद है (यानी सूर्योदय के समय तृतीया है)। हिंदू धर्म में उदयातिथि को पूरे दिन के लिए मान्य माना जाता है।
2. निर्णय: 19 या 20?
हालांकि काल निर्णय पंचांग में 19 अप्रैल और लाला रामस्वरूप कैलेंडर में 20 अप्रैल मेंशन है। ज्यादातर पंचांगों और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 को ही अक्षय तृतीया मनाना श्रेष्ठ रहेगा। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं:
उदयातिथि: भारतीय परंपरा में सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसी का प्रभाव पूरे दिन माना जाता है।
संपूर्णता: 19 अप्रैल को तृतीया सूर्योदय के बाद शुरू होगी, जबकि 20 अप्रैल को यह सूर्योदय के समय प्रभावी रहेगी, जो पूजा और खरीदारी (सोना खरीदना आदि) के लिए सबसे शुभ मुहूर्त प्रदान करती है।
3. कैलेंडर और ऑनलाइन अंतर क्यों?
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: ये अक्सर 'एस्ट्रोनॉमिकल डेटा' (खगोलीय गणना) दिखाते हैं। अगर तिथि 19 तारीख की दोपहर 2 बजे शुरू हो रही है, तो वे उसे 19 तारीख ही लिख देते हैं।
कैलेंडर (पंचांग): ये 'शास्त्रों' और 'उदया तिथि' के नियम पर चलते हैं। चूंकि 20 तारीख की सुबह तृतीया मौजूद है, इसलिए वे उसे 20 तारीख को ही चिह्नित करते हैं।
निष्कर्ष: यदि आपके स्थानीय कैलेंडर में 20 अप्रैल दी गई है, तो आप उसी और 19 की दी है तो उस दिन का पालन करें। धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और नई शुरुआत के लिए 20 अप्रैल, 2026 (सोमवार) का दिन ही सर्वसम्मत रूप से सही माना जाएगा।