अमेरिका-ईरान तनाव, सेंसेक्स में 788 अंकों की बड़ी गिरावट

पुनः संशोधित सोमवार, 6 जनवरी 2020 (17:33 IST)
मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच तेल की कीमतों में उछाल का सोमवार को स्थानीय शेयर बाजारों पर गहरा असर देखा गया और बंबई का सेंसेक्स 788 अंक टूट गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी 234 अंक की गिरावट रही।
बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स कारोबार की समाप्ति पर 787.98 अंक यानी 1.90 प्रतिशत गिरकर 40,676.63 अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 233.60 अंक यानी 1.91 प्रतिशत घटकर 11,993.05 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में बजाज फाइनेंस के शेयर में सबसे ज्यादा 4.63 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके बाद स्टेट बैंक, इंडसइंड बैंक, मारुति, एचडीएफसी, हीरो मोटोकार्प, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी गिरावट रही। शेयर बाजार में गिरावट की आम धारणा के उलट केवल टाइटन और पावर ग्रिड के शेयरों में ही मजबूती का रुख रहा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई धमकी के बाद बाजार में भारी बिकवाली का दबाव रहा। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान ने बदले के लिए अमेरिकी प्रतिष्ठानों अथवा नागरिकों पर हमला किया तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इससे पहले बगदाद में अमेरिका के एक ड्रोन हमले में ईरानी सेना के एक शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी मारे गए। इसके बाद ईरान की ओर से बदले की कारवाई का अंदेशा बना हुआ है।

राष्ट्रपति ट्रंप का यह वक्तव्य ईरान के यह कहने के कुछ ही देर बाद आया जिसमें उसने कहा कि वह 2015 के परमाणु समझौते से अब बंधा नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने इराक को भी कड़े प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। इराक ने कहा है कि वह बगदाद से अमेरिकी सैनिकों को बाहर करने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित कराएगा।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारत के लिए कच्चे तेल को लेकर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश का वित्तीय घाटा बढ़ सकता है जिसका समूची अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव होगा। ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव 2 प्रतिशत बढ़कर 69.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सोमवार को कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे लुढ़ककर 72.04 रुपए प्रति डॉलर पर चल रहा था।


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