कौन हैं शनिदेव, जानिए उनका रहस्य....

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
।।ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
 
का भगवान शनिदेव से क्या संबंध है यह जानना जरूरी है। पहली बात तो यह जानना भी जरूरी है कि शनिग्रह और शनिदेव दो अलग-अलग है। शनिग्रह को शनिदेव नहीं कहते हैं। शनि ग्रह के अधिपति देव भगवान भैरव हैं।
आकाश में शनि ग्रह वायव्य दिशा में दिखाई देते हैं। वायव्य दिशा के स्वामी भगवान पवनदेव हैं। हमारे सौर्य मंडल में सूर्य सहित जितने भी ग्रह हैं वे किसी भी प्रकार के देवी या देवता नहीं है जैसाकि उनके बारे में ज्योतिष प्रचारित करते हैं। हां, देवताओं के नाम पर ही उक्त ग्रहों के नाम रखे गए हैं। ग्रहों की पूजा करना मूर्खता है। ग्रहों का असर आपके शरीर आपके घर और आपके आसपास के वातावरण पर होता है। इनके बुरे असर से बचने के लिए किसी वस्तुशास्त्री और ज्योतिष के अच्छे जानकार से मिलना चाहिए।
 
वैज्ञानिक दृष्टिकोण : खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास 120500 किमी, 10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किमी. की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है। गुरु शक्ति पृथ्‍वी से 95 गुना अधिक और आकार में बृहस्पती के बाद इसी का नंबर आता है। माना जाता है कि अपनी धूरी पर घूमने में यह ग्रह नौ घंटे लगाता है।
 
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