नर और नारायण कौन थे?

परमेश्वर सदाशिव (शिव, शंकर, रुद्र या महेश नहीं) के तीन प्रकट रूपों में से प्रथम भगवान विष्णु के 24 अवतार माने गए हैं, उनमें से ही दो अवतार हैं- नर और नारायण। हम जिन्हें नारायण कहते हैं वे विष्णु के अवतार हैं। उनका भजन भी आपने सुना होगा- श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि। तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी, हरि हरि।
नर और नारायण की कहानी को जानना जरूरी है। यहां उनके जीवन की कहानी नहीं बल्कि संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है। इन्हीं दो भाइयों के कारण धर्म और सत्य का भारत में विस्तार हुआ। अधिकतर हिन्दू इनकी कथा को नहीं जानते और वे यह मानते हैं कि ये विष्णु ही है।> > अवतार का अर्थ किसी में विष्णु का अवतरण होना। भगवान राम भी विष्णु के अवतार थे लेकिन वे स्वयं विष्‍णु नहीं थे। वे भी ‍ब्रह्मा और वशिष्ठ की अनुशंसा पर विष्णु के अवतार घोषित किए गए थे। अर्थात राम एक माध्यम थे और विष्णु ने उनमें उतरकर लीला रची थी। अवतार का अर्थ किसी में किसी दूसरे का अवतरण होना। हालांकि कुछ अवतारों में विष्णु स्वयं प्रकट हैं।
24 अवतारों का क्रम निम्न है-1.आदि परषु, 2.चार सनतकुमार, 3.वराह, 4.नारद, 5.नर और नारायण, 6.कपिल, 7दत्तात्रेय, 8.याज्ञ, 9.ऋषभ, 10.पृथु, 11.मतस्य, 12.कच्छप, 13.धनवंतरी, 14.मोहिनी, 15.नृसिंह, 16.हयग्रीव, 17.वामन, 18.परशुराम, 19.व्यास, 20.राम, 21.बलराम, 22.कृष्ण, 23.बुद्ध और 24.कल्कि।

भगवान ब्रह्मा के पुत्र धर्म की पत्नी रुचि के माध्यम से श्रीहरि विष्णु ने नर और नारायण नाम के दो ऋषियों के रूप में अवतार लिया। जन्म लेते ही वे बदरीवन में तपस्या करने के लिए चले गए। उसी बदरीवन में आज बद्रीकाश्रम बना है। वहीं नर और नारायण नामक दो पहाड़ है। वहीं पास में केदारनाथ का पवित्र शिवलिंग है जिसे नर और नारायण ने मिलकर ही स्थापित किया था। यह लगभग 8 हजार ईसा पूर्व की बात है।

नर और नारायण की तपस्या से ही संसार में सुख और शांति का विस्तार हुआ। आज भी केदानाथ और बद्रीकाश्रम में भगवान नर-नारायण निरन्तर तपस्या में रत रहते हैं। इन्होंने ही द्वापर में श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतार लेकर लीला रची थी। लीला का अर्थ नाटक नहीं होता।

उनकी तपस्या को देखकर देवराज इंद्र ने दी जब चुनौती...





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