महाबली राजा बलि के 10 रहस्य, जानिए...

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
राजा बलि के पूर्व जन्म की कथा :
पौराणिक कथाओं अनुसार राजा बलि अपने पूर्व जन्म में एक जुआरी थे। एक जुए से उन्हें कुछ धन मिला। उस धन से इन्होंने अपनी प्रिय वेश्या के लिए एक हार खरीदा। बहुत खुशी-खुशी ये हार लेकर वेश्या के घर जाने लगा। लेकिन रास्ते में ही इनको मृत्यु ने घेर लिया। यह मरने ही वाला था कि इसने सोचा कि अब ये हार वेश्या तक तो पहुंचा नहीं पाऊंगा, चलो इसे शिव को ही अर्पण कर दूं। ऐसा सोचकर उसने हार शिव को अर्पण कर दिया और मृत्यु को प्राप्त हुआ।
मरकर वह यमराज के समक्ष उपस्‍थित हुआ। चित्रगुप्त ने उसके कर्मों का लेखा-जोखा देखकर कहा कि इसने तो पाप ही पाप किए हैं, लेकिन मरते-समय इसने जुए के पैसे से वेश्या के लिए खरीदा हार ‘शिवार्पण’ कर दिया है। ये ही एकमात्र इसका पुण्य है। चित्रगुप्त की बात सुनकर यमराज ने उससे (जुआरी बलि से) पूछा- रे पापी, तू ही बता पहले पाप का फल भोगोगे कि पुण्य का। जुआरी ने कहा कि पाप तो बहुत हैं, पहले पुण्य का फल दे दो। उस पुण्य के बदले उसे दो घड़ी के लिए इंद्र बनाया गया।

इंद्र बनने पर वह अप्सराओं के नृत्य और सुरापान का आनंद लेने लगा। तभी नारदजी आते हैं, उसे देखकर हंसते हैं और एक बात बोलते हैं कि अगर इस बात में संदेह हो कि स्वर्ग-नर्क हैं तब भी सत्कर्म तो कर ही लेना चाहिए वर्ना अगर ये नहीं हुए तो आस्तिक का कुछ नहीं बिगड़ेगा, पर हुए तो नास्तिक जरूर मारा जाएगा। यह बात सुनते ही उस जुआरी को होश आ गया। उसने दो घड़ी में ऐरावत, नंदन वन समेत पूरा इन्द्रलोक दान कर दिया। इसके प्रताप से वह पापों से मुक्त हो इंद्र बना और बाद में राजा बलि हुआ।

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