ब्रह्मांड में कौन किससे बड़ी शक्ति है?

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
भगवान : बुद्धत्व, निर्वाण, मोक्ष, परमपद या विष्णुपद को प्राप्त व्यक्ति ही भगवान होता है। इसके लिए कुछ जन्मों की साधना होती है। के संपूर्ण नियमों से परे भगवान की सत्ता होती है। वह एक शुद्ध प्रकाश होता है, जो उस महाप्रकाश का अंश है। जैसे जैन कैवल्य ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति को तीर्थंकर या अरिहंत कहते हैं। बौद्ध संबुद्ध कहते हैं वैसे ही हिंदू भगवान कहते हैं।
भगवान का अर्थ है जितेंद्रिय अर्थात इंद्रियों को जीतने वाला। भगवान शब्द संस्कृत के भगवत शब्द से बना है। जिसने पांचों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है तथा जिसकी पंचतत्वों पर पकड़ है उसे भगवान कहते हैं।  भगवान शब्द का स्त्रीलिंग भगवती है। वह व्यक्ति जो पूर्णत: मोक्ष को प्राप्त हो चुका है और जो जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर कहीं भी जन्म लेकर कुछ भी करने की क्षमता रखता है वह भगवान है। परमहंस है।



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