Swarg Narak | कहां है स्वर्ग लोक?
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धरती पर स्वर्ग : जिस तरह धरती पर पाताल और नरक लोक की स्थिति बताई गई है उसी तरह धरती पर स्वर्ग की स्थिति भी बताई गई है। आज के कश्मीर और हिमालय के क्षेत्र को उस काल में स्वर्गलोक कहा जाता था, जहां के आकाश में बादल छाए रहते थे और जहां से पानी सारे भारत में फैलता था।
कश्मीर में देवता रहते थे जहां का राजा इंद्र था। इसके अलावा आरावली की पहाड़ियों और गुजरात के समुद्र तट पर स्वर्ग का निर्माण किया गया था। दक्षिण के समुद्र तट पर भी विष्णुपुरी बसाई गई थी। उक्त तीनों ही जगह को वैकुंठ कहा जाता था। धरती के स्वर्ग पर दानव भी राज करना चाहते थे। देवता जहां धरती पर रहते थे वहीं वह अंतरिक्ष में भी रहते थे।
अंतरिक्ष में स्वर्ग : हिन्दू धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार, कृतक त्रैलोक्य- भूः, भुवः और स्वः- ये तीनों लोक मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। सूर्य और ध्रुव के बीच जो चौदह लाख योजन का अन्तर है, उसे स्वर्लोक कहते हैं। वहां अंतरिक्ष में भव्य स्वर्लोक का वर्णन पुराणों में मिलता है जहां पुण्य आत्माएं कुछ काल के लिए रहती है।
पुराणों अनुसार कैलाश के उपर स्वर्ग और नीचे नरक व पाताल लोक है। संस्कृत शब्द स्वर्ग को मेरु पर्वत के ऊपर के लोकों हेतु प्रयुक्त किया है।
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