तांका 11 दिल का दर्द सलीके से उतार शब्दों की धार कभी सैलाब बन कभी गिरी गंभीर। अबोध मन अनबूझा संसार खोखले शब्द सहमे से उत्तर सुलगते सवाल। मेरा नसीब न ही तुझे पाना है न तुझे खोना सुलगती रातों में यादों से बतियाना।...