भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों पर ले जाने उतरेंगी ललिता

पुनः संशोधित रविवार, 14 अगस्त 2016 (19:46 IST)
रियो डि जेनेरियो। सोमवार को यहां में जब महिला 3,000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल में उतरेंगी तो उनकी नजरें इतिहास रचने पर टिकी होंगी।
महाराष्ट्र के सतारा जिले की 27 वर्षीय ललिता के लिए पदक जीतने की राह मुश्किल होगी, लेकिन नामुमकिन नहीं। वे 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पीटी उषा के बाद एथलेटिक्स फाइनल के क्वालीफाई करने वाली दूसरी भारतीय महिला हैं।
 
ललिता 19.76 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ अपनी हीट में चौथे स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही थीं। वे सभी क्वालीफायरों में 7वें स्थान पर रही थीं। उनके इस प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर उनके माता-पिता को महाराष्ट्र में मंदिरों में जाते और पूजा करते दिखाया गया और अगर वे सोमवार को अपने प्रदर्शन को दोहराती हैं या इसमें सुधार करती हैं तो एथलेटिक्स में भारत की नई स्टार बनकर उभरेंगी।
 
अब देखना होगा कि ललिता उषा के प्रदर्शन में सुधार कर पाती हैं या नहीं? जो सेकंड के 100वें हिस्से से कांस्य पदक जीतने से चूक गई थीं। फाइनल में हालांकि ललिता को गत विश्व चैंपियन, गत ओलंपिक चैंपियन और सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली धाविकाओं से चुनौती मिलेगी।
 
पिछले साल बीजिंग में विश्व चैंपियनशिप में ललिता से आगे रही कम से कम 5 धाविकाएं सोमवार को फाइनल में हिस्सा लेंगी। विश्व चैंपियनशिप में ललिता 9 मिनट 27.86 सेकंड के साथ 8वें स्थान पर रही थी। 
 
सोमवार को खिताब की प्रबल दावेदार कीनिया में जन्मीं और 2013 से बहरीन की ओर से खेल रही रूथ जेबेट होंगी। वे 8 मिनट 59.97 सेकंड के साथ सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ी हैं। एशियाई खेल 2014 में जेबेट (स्वर्ण पदक विजेता) के डिस्क्वालीफाई होने पर ही ललिता का कांस्य पदक रजत में बदला था। (भाषा) 



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