मैं आपका राष्ट्रध्वज बोल रहा हूं...

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संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद व पं. जवाहरलाल नेहरू के भाषण हुए। इसके पश्चात्‌ श्रीमती हंसाबेन मेहता ने अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद को मेरा रेशम वाला स्वरूप सौंपा और कहा कि आजाद भारत में पहला राष्ट्रध्वज जो इस सदन में फहराया जाएगा, वह भारतीय महिलाओं की ओर से इस राष्ट्र को एक उपहार है। सभी लोगों के समक्ष मेरा यह पहला प्रदर्शन था। 'सारे जहां से अच्छा' व 'जन-गण-मन' के सामूहिक गान के साथ यह समारोह संपन्न हुआ।
पंडित नेहरू ने मेरे मानक बताए, जिन्हें आपको भी जानना जरूरी है। (जिनका उल्लेख भारतीय मानक संस्थान के क्रमांक आई.एस.आई.-1-1951, संशोधन 1968 में  किया गया)
> उन्होंने कहा भारत का राष्ट्रध्वज समतल तिरंगा होगा। यह आयताकार होकर इसकी लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 2:3 होगा, तीन रंगों की समान आड़ी पट्टिका होगी। सबसे ऊपर केसरिया, मध्य में सफेद तथा नीचे हरे रंग की पट्टी होगी। सफेद रंग की पट्टी पर मध्य में सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का चौबीस शलाकाओं वाला चक्र होगा, जिसका व्यास सफेद रंग की पट्टी की चौड़ाई के बराबर होगा।> मेरे निर्माण में जो वस्त्र उपयोग में लाया जाएगा, वह खादी का होगा तथा यह सूती, ऊनी या रेशमी भी हो सकता है। लेकिन शर्त यह होगी, कि सूत हाथ से काता जाएगा एवं हाथ से बुना जाएगा। इसमें हथकरघा सम्मिलित है। सिलाई के लिए केवल खादी के धागों का ही प्रयोग होगा। नियमानुसार मेरे लिए खादी के एक वर्ग फीट कपड़े का वजन 205 ग्राम होना चाहिए।

मेरे निर्माण के लिए हाथ से बनी खादी का उत्पादन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के एक समूह द्वारा पूरे देश में मात्र ‘गरग’ गांव में किया जाता है, जो उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले में बेंगलूर-पूना रोड पर स्थित है। इसकी स्थापना 1954 में हुई, परन्तु अब मेरा निर्माण क्रमश: ऑर्डिनेंस क्योरिंग फैक्टरी शाहजहांपुर, खादी ग्रामोद्योग आयोग मुंबई एवं खादी ग्रामोद्योग आयोग दिल्ली में होने लगा है। निजी निर्माताओं द्वारा भी राष्ट्रध्वज का निर्माण किए जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन मेरे गौरव व गरिमा को दृष्टिगत रखते हुए यह जरूरी है कि मुझ पर आई.एस.आई. (भारतीय मानक संस्थान) की मुहर लगी हो।

मेरे रंगों का अर्थ भी स्पष्ट है। केसरिया रंग साहस और बलिदान का, सफेद रंग सत्य और शांति का तथा हरा रंग श्रद्धा व शौर्य का प्रतीक है। चौबीस शलाकाओं वाला नीला चक्र 24 घंटे सतत्‌ प्रगति का प्रतीक है और प्रगति भी ऐसी जैसे कि नीला अनंत विशाल आकाश एवं नीला अथाह गहरा सागर।



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