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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 3 जनवरी 2026 (10:42 IST)

Magh Maas: माघ माह का महत्व और पौराणिक कथा

2026 Magh Maas Katha
Significance of Magh Maas: माघ माह हिन्दू पंचांग का अत्यंत महत्वपूर्ण महीना है, जो उत्तरायण के समय आता है। यह माह मुख्य रूप से धार्मिक, आध्यात्मिक, और पुण्य लाभ के लिए विशेष माना जाता है। माघ माह के दौरान कई व्रत, त्योहार और तिथियां होती हैं, जो पवित्रता, तपस्या और मोक्ष के प्रतीक मानी जाती हैं।ALSO READ: माघ मेला 2026: संगम तट पर बसा भव्य तंबुओं का शहर, जानिए स्नान, कल्पवास का महत्व
 
माघ माह का महत्व: माघ माह का खास महत्व धार्मिक कृत्यों और उपवासों के लिए है। इस माह में विशेष रूप से गंगा स्नान, दान, और तपस्या की जाती है। माघ में गंगा स्नान का विशेष महत्व है, क्योंकि इस महीने में गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी के साथ माघ पूर्णिमा, माघ स्नान, और माघ एकादशी जैसे व्रत और त्योहार इस माह में आते हैं। 
 
माघ माह के दौरान साधक अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष साधना करते हैं। यह समय तपस्या और भक्ति के लिए उपयुक्त होता है, और साधक विशेष रूप से शिव और विष्णु के पूजन में ध्यान लगाते हैं। विशेष रूप से माघ की पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान और पूजा-अर्चना करने का महत्व है।

माघ शुक्ल पक्ष में संक्रांति का पर्व भी आता है, जो सूर्य उत्तरायण होने का संकेत है। इस दिन तिल और गुड़ का दान करने की परंपरा है। इसे माघ संक्रांति कहा जाता है। माघ माह में किए गए व्रत, दान, और स्नान का महत्व अत्यधिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में किए गए अच्छे कार्यों से पुण्य का लाभ मिलता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।ALSO READ: Magh Mela 2026: माघ मेले में जा रहे हैं तो जानिए क्या करें और क्या नहीं
 
माघ माह की पौराणिक कथा: माघ माह से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जो स्कंदपुराण के रेवाखंड में वर्णित है, यह कथा ब्राह्मण शुभव्रत के कल्याण प्राप्ति की है।
 
माघ स्नान की कथा में उल्लेख में आया है कि प्राचीन काल में नर्मदा तट पर शुभव्रत नामक ब्राह्मण निवास करते थे। वे सभी वेद शास्त्रों के अच्छे ज्ञाता थे। किंतु उनका स्वभाव धन संग्रह करने का अधिक था। उन्होंने धन तो बहुत एकत्रित किया। वृद्धावस्था के दौरान उन्हें अनेक रोगों ने घेर लिया। तब उन्हें ज्ञान हुआ कि मैंने पूरा जीवन धन कमाने में लगा दिया अब परलोक सुधारना चाहिए। वह परलोक सुधारने के लिए चिंतातुर हो गए।
 
अचानक उन्हें एक श्लोक याद आया जिसमें माघ मास के स्नान की विशेषता बताई गई थी। उन्होंने माघ स्नान का संकल्प लिया और 'माघे निमग्ना: सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।।' इसी श्लोक के आधार पर नर्मदा में स्नान करने लगे। नौ दिनों तक प्रात: नर्मदा में जल स्नान किया और 10वें दिन स्नान के बाद उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।   
 
शुभव्रत ने जीवन भर कोई अच्छा कार्य नहीं किया था लेकिन माघ मास में स्नान करके पश्चाताप करने से उनका मन निर्मल हो गया। माघ मास के स्नान करने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इस तरह जीवन के अंतिम क्षणों में उनका कल्याण हो गया और उनका परलोक सुधार गया। 
 
माघ स्नान, दान, और भक्ति से जुड़ी यह विशेष समयावधि आत्मिक शांति और समृद्धि लाती है।ALSO READ: माघ मेले में जा रहे हैं तो करें पांच तरह का दान, सभी संकट हो जाएंगे दूर

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