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यमुना बेल्ट को हरा-भरा बनाने की बड़ी मुहिम, एडवोकेट्स फॉर ह्यूमैनिटी और नोएडा लोक मंच में समझौता

Advocates For Humanity
दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण संरक्षण और यमुना नदी के तटीय क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। युवाओं की अग्रणी गैर-लाभकारी संस्था 'एडवोकेट्स फॉर ह्यूमैनिटी' ने 'नोएडा लोक मंच' के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत अतिक्रमण और पर्यावरण क्षरण की मार झेल रही यमुना बेल्ट में 5 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के इकोसिस्टम को सुधारने में मदद मिलेगी।
 
एडवोकेट्स फॉर ह्यूमैनिटी संस्था विभिन्न स्कूलों के साथ साझेदारी करके और छात्र स्वयंसेवकों को एकजुट कर इस अभियान में युवाओं की भागीदारी का नेतृत्व करेगी। इस मुहिम का उद्देश्य न केवल हरियाली को वापस लाना है, बल्कि युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना भी है।
 
इस वृक्षारोपण अभियान के तहत पारंपरिक पौधों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर फलों के पेड़ भी लगाए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देना है, ताकि विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं और पक्षियों को प्राकृतिक आवास व भोजन मिल सके और वे इस इलाके में फल-फूल सकें।

युवाओं को पर्यावरण लीडर बनाना हमारा लक्ष्य

'एडवोकेट्स फॉर ह्यूमैनिटी' की संस्थापक वंशिका गोयल ने इस ऐतिहासिक साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह समझौता सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भविष्य का लीडर बनाने और उन्हें सशक्त करने की एक अनूठी कोशिश है। अलग-अलग स्कूलों के छात्रों को एक मंच पर लाकर हम यह साबित करना चाहते हैं कि युवा शक्ति सामूहिक प्रयासों से समाज में कितना सार्थक और बड़ा बदलाव ला सकती है।

टिकाऊ भविष्य के लिए अनूठी पहल

इस दीर्घकालिक परियोजना के तहत केवल पौधे लगाने पर ही जोर नहीं होगा, बल्कि पौधारोपण अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी के जरिए छात्रों को इस मुहिम से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे छात्र एक हरे-भरे और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकेंगे, जिससे उनमें जीवनभर के लिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक स्वाभाविक प्रतिबद्धता विकसित होगी। 
 
जलवायु परिवर्तन और स्थिरता की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में 'एडवोकेट्स फॉर ह्यूमैनिटी' के लिए यह सहयोग एक मील का पत्थर साबित होगा, जो पर्यावरण के क्षेत्र में युवा नेतृत्व की भूमिका को और मजबूत करेगा।